शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

भारत बनाम भारत..

Happy Republic Day..!!!

जनवरी 25, 2007 Posted by | हिन्दी, Uncategorized | 3 टिप्पणियाँ

मुझको..

 frens.jpg

गुमनामियों मे रहना, नहीं है कबूल मुझको..
चलना नहीं गवारा, बस साया बनके पीछे..

वोह दिल मे ही छिपा है, सब जानते हैं लेकिन..
क्यूं भागते फ़िरते हैं, दायरो-हरम के पीछे..

अब “दोस्त” मैं कहूं या, उनको कहूं मैं “दुश्मन”..
जो मुस्कुरा रहे हैं,खंजर छुपा के अपने पीछे..

तुम चांद बनके जानम, इतराओ चाहे जितना..
पर उसको याद रखना, रोशन हो जिसके पीछे..

वोह बदगुमा है खुद को, समझे खुशी का कारण..
कि मैं चेह-चहा रहा हूं, अपने खुदा के पीछे..

इस ज़िन्दगी का मकसद, तब होगा पूरा “नीरज”..
जब लोग याद करके, मुस्कायेंगे तेरे पीछे..

—“नीरज”..

जनवरी 18, 2007 Posted by | शायरी, हिन्दी | 10 टिप्पणियाँ

नारी नारे.. Nari Nare..

Enjoi this beautiful and colourful song from Hisham Abbas..

जनवरी 13, 2007 Posted by | गीत, Uncategorized | 7 टिप्पणियाँ

प्यार के पल..

 clock-uk.jpg

हम रहें या न रहें कल, कल याद आयेंगे ये पल..
पल ये हैं प्यार के पल.. चल आ मेरे संग चल..
चल सोचें क्या.. छोटी सी है ज़िन्दगी..
कल मिल जायें, तो होगी खुश-नसीबी..
हम रहें या न रहें.. कल याद आयेंगे येह पल..

हम रहें या न रहें कल, कल याद आयेंगे ये पल..
पल ये हैं प्यार के पल.. चल आ मेरे संग चल..
चल सोचें क्या.. छोटी सी है ज़िन्दगी..
कल मिल जाये, तो होगी खुश-नसीबी..
हम रहें या न रहें.. कल याद आयेंगे ये पल..

शाम का आंचल ओढ के अयी.. देखो वो रात सुहानी..
आ लिखदें हम दोनो मिलके.. अपनी ये प्रेम कहानी..

हम रहें या न रहें.. कल याद आयेंगे ये पल..

आने वाली सुबह जाने, रंग क्या लाये दीवानी..
मेरी चाहत को रख लेना, जैसे कोई निशानी..
हम रहें या न रहें.. याद आयेंगे ये पल..

हम रहें या न रहें कल, कल याद आयेंगे ये पल..
पल येह हैं प्यार के पल.. चल आ मेरे संग चल..
चल सोचें क्या.. छोटी सी है ज़िन्दगी..
कल मिल जायें, तो होगी खुश-नसीबी..

हम रहें या न रहें.. कल याद आयेंगे ये पल..
———————————————प्यार के पल.. 

इसे “सुनें“/”देखें“..

जनवरी 7, 2007 Posted by | गीत, हिन्दी | 22 टिप्पणियाँ

रास्तों की मर्ज़ी है..

path.jpg 

बे-ज़मीं लोगों को..
बे-करार आंखों को..
बद-नसीब कदमों को..
जिस तरफ़ भी ले जायें..
रास्तों की मर्ज़ी है..

बे-निशां जज़ीरों पर..
बद-गुमा शहरों में..
बे-ज़ुबां मुसाफ़िर को..
जिस तरफ़ भी भटकायें..
रस्तों की मर्ज़ी है..

रोक लें या बढने दें..
थाम लें या गिरने दें..
वस्ल की लकीरों को..
तोड दें या मिलने दें..
रास्तों की मर्ज़ी है..

अजनबी कोई लाकर..
हमसफ़र बना डालें..
साथ चलने वालों की..
राह जुदा बना डालें..
या मुसाफ़तें सारी..
खाक मे मिला डालें..
रास्तों की मर्ज़ी है..

— Author Unknown..

दिसम्बर 28, 2006 Posted by | शायरी, हिन्दी | 4 टिप्पणियाँ

सयीद राही..

 

आंख जब भी बंद किया करते हैं..
सामने आप हुआ करते हैं..

आप जैसा ही मुझे लगता है..
ख्वाब मे जिससे मिला करते हैं..

तू अगर छोडके जाता है तो क्या..
हादसे रोज़ हुआ करते हैं..

नाम उनका ना, कोई उनका पता..
लोग जो दिलमे रहा करते हैं..

हमने “राही” का चलन सीखा है..
हम अकेले ही चला करते हैं..

— सयीद राही.. 

दिसम्बर 18, 2006 Posted by | शायरी, हिन्दी | 5 टिप्पणियाँ

मौला मेरे.. मौला मेरे..

praying_child_1.jpg 

मौला मेरे.. मौला मेरे..

मौला मेरे.. मौला मेरे..

मौला मेरे.. मौला..

आंखे तेरी.. इतनी हसीन..

के इनका आशिक मैं बन गया हूं..

मुझको बसाले इनमे तू.. 

 

मुझसे ये हर घडी मेरा दिल कहे..

तुम ही हो इसकी आरज़ू..

मुझसे ये हर घडी मेरे लब कहें..

तेरी ही हो सब गुफ़्तगू..

 

बातें तेरी इतनी हसीन..

मैं याद इनको जब करता हूं..

फ़ूलों सी आये खुश्बू..

 

रख लूं छुपाके मैं कहीं, तुझको..

साया भी तेरा ना मैं दूं..

रख लूं बनाके कहीं घर मैं तुझे..

साथ तेरे मैं ही रहूं..

 

जुल्फ़ें तेरी इतनी घनी..

देखके इनको ये सोचता हूं..

साये मे इनके मैं जीयूं..

 

मौला मेरे.. मौला मेरे..

मौला मेरे.. मौल मेरे..

मेरा दिल येही बोला..

यारा राज़ ये इसने है मुझपर खोला..

के है अश्क-ए-मोहब्बत है जिसके दिल मे..

उसको पसंद करता है मौला मेरा दिल..

यही बोला..

मौला मेरे.. मौला मेरे..

मेरे मौला..

इसे सुनें

दिसम्बर 17, 2006 Posted by | गीत, हिन्दी | 2 टिप्पणियाँ

पता नहीं..

 love.jpg

पता नहीं कौन से मोड पर..
ज़िन्दगी हम से तुम्हारा साथ मांगेगी..

रास्तों के पत्थर ना गिरादें मुझे..
इन लडखडाती राहों से डर के तुम्हारा हांथ मांगेगी..

उजाले भी ऐसे मिले कि रोशनी से जल गये हम..
इन उजालों से छिप कर कोई हसीन रात मांगेगी..

आज़मायेगी लम्हा-लम्हा दोस्ती ये हमारी..
वक्त की कोई घडी, वादे भरी बात मांगेगी..

हम अकेले रहें, या रहे भीड में..
आरज़ू दिल की तो बस तेरी मुलाकात मांगेगी..

ज़िन्दगी के सफ़र मे, ओ मेरे हमसफ़र..
ना जाने किस वक्त मोहब्बत, तुझसे अपने जज़बात मांगेगी..

— Author Unkown..

दिसम्बर 17, 2006 Posted by | शायरी, हिन्दी | 1 टिप्पणी

ये जो ज़िन्दगी की किताब है..

ये जो ज़िन्दगी की किताब है.. 

ये जो ज़िन्दगी की किताब है..
ये किताब भी क्या खिताब है..
कहीं एक हसीं सा ख्वाब है..
कही जान-लेवा अज़ाब है..

कहीं आंसू की है दास्तान..
कहीं मुस्कुराहटों का है बयान..
कई चेहरे हैं इसमे छिपे हुये..
एक अजीब सा ये निकाब है..

कहीं खो दिया, कहीं पा लिया..
कहीं रो लिया..
कहीं गा लिया..
कहीं छीन लेती है हर खुशी..
कहीं मेहरबान ला-ज़वाब है..

कहीं छांव है, कहीं धूप है..
कहीं बरकतों की हैं बारिशें..
तो कहीं, और ही कोई रूप है..

ये जो ज़िन्दगी की किताब है..
ये खिताब लाजवाब है..

— राजेश रेड्डी..

इसे सुनें – जगजीत सिंह

दिसम्बर 15, 2006 Posted by | गज़ल, शायरी, हिन्दी | 2 टिप्पणियाँ

वो दिल ही क्या – कतील शिफ़ाई..

 

वो दिल ही क्या जो तेरे मिलने की दुआ ना करे..

मैं तुझको भूल के ज़िन्दा रहूं, ये खुदा ना करे..

रहेगा साथ, तेरा प्यार, ज़िन्दगी बन कर..

ये और बात, मेरी ज़िन्दगी अब वफ़ा ना करे..

ये ठीक है माना, नहीं मरता कोई जुदाई में..

खुदा किसी को, किसी से जुदा ना करे..

सुना है उसको मोहब्ब्त दुआयें देती है..

जो दिल पे चोट तो खाये, पर गिला ना करे..

ज़माना देख चुका है, परख चुका है उसे..

“कातिल” जान से जाये, पर इल्तिजा ना करे..

—कतील शिफ़ाई..

इसे “सुनें” गायक – जगजीत सिंह..

दिसम्बर 14, 2006 Posted by | गज़ल, शायरी, हिन्दी | 5 टिप्पणियाँ