शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

स्वागत है../ You’r welcome..

जैसा कि आप सभी ने देखा होगा.. आम तोर पे लगभग १० मे से ९ लोग शेर-ओ-शायरी के शोकीन होते हैं..

उन ९ लोगों मे से मैं भी एक हूं.. एक अच्छा शेर मेरे लिये एक अच्छे दिन की शुरुवात होता है.. )

 18-aug_7.jpg

मैं भी लिखता हूं.. पर चिन्ता ना करें आपको ऐसा torture नहीं दूंगा मैं यहां पे.. इस ब्लोग पे चुने हुए अच्छे-अच्छे शेर.. शायरी.. या गीत.. लिखने के नेक इरादे से आप सभी का स्वागत करता हूं..

चलिये, वापिस चलते हैं मुख्य पन्ने पर..

39 टिप्पणियाँ »

  1. Hi! we don’t know eachother and we might not even speak the same language. I by accident came across your page and it looks beautiful, esp the pictures! I was just doing a random search for a picture and I was taken to your website. It just seemed beautiful although I cant read Hindi or whatever dialect of India your are speaking, I just wanted to say hello and that your page is wonderful and that you must be a beautiful person! Have a great day my friend! Good luck with your career!

    Heather

    टिप्पणी द्वारा Heather | जनवरी 6, 2007 | प्रतिक्रिया

    • Thank you for your comments.. I hope that you will visit quite often and enjoy the same feeling everytime.. 🙂

      टिप्पणी द्वारा Raj Gaurav | अक्टूबर 22, 2011 | प्रतिक्रिया

  2. राज,

    मैं तुमसे यदा-कदा पत्रालाप करना चाहूंगा, तुम्हारी सुविधानुसार। क्या सोचते हो?

    – घनश्याम

    टिप्पणी द्वारा घनश्याम | फ़रवरी 28, 2007 | प्रतिक्रिया

    • घनश्याम जी,
      देरी से जवाब के लिए माफ़ी चाहता हू.. आज काफी महीनो के बाद अपना ब्लॉग देख रहा हू.. आपके पत्राचार का मैं स्वागत करता हू..
      राज गौरव मिश्रा
      raj.g.mishra at gmail.com

      टिप्पणी द्वारा Raj Gaurav | अक्टूबर 22, 2011 | प्रतिक्रिया

  3. Hi Raj,

    this is Raj Gaurav here, i have seen your compositions which are very very sweet,wonderful,impressive and inspirative. I wanna to communicate with you if you find it right please contact me at rajgreat_1981@rediffmail.com.

    टिप्पणी द्वारा Raj Gaurav | मार्च 19, 2007 | प्रतिक्रिया

    • गौरव जी,
      देरी से जवाब के लिए माफ़ी चाहता हू.. आज काफी महीनो के बाद अपना ब्लॉग देख रहा हू.. आपके पत्राचार का मैं स्वागत करता हू..
      राज गौरव मिश्रा
      raj.g.mishra at gmail.com

      टिप्पणी द्वारा Raj Gaurav | अक्टूबर 22, 2011 | प्रतिक्रिया

  4. it is veru wonderfull

    टिप्पणी द्वारा saurabh jain | मार्च 2, 2008 | प्रतिक्रिया

    • सौरव जी,
      मेरे ब्लॉग को पढने के लिए आपका शुक्रिया..

      टिप्पणी द्वारा Raj Gaurav | अक्टूबर 22, 2011 | प्रतिक्रिया

  5. batain bachpan ki jeene nahin detin kisi ne udaya majak to kisi ne samjha majak baat dil ki unse kahne gaye to kaha bhool jawo wo bachpan tha

    टिप्पणी द्वारा vishal srivastava | जुलाई 28, 2008 | प्रतिक्रिया

  6. उनकी गली से मेरा जनाजा निकला
    पर वो ना निकले जिनके लिए जनाजा निकला
    उनका घर आते ही दोस्त सिटी बजाने लगे
    रख मेरा जनाजा उसे पटाने लगे

    टिप्पणी द्वारा pankaj | अक्टूबर 1, 2008 | प्रतिक्रिया

  7. उनकी गली से मेरा जनाजा निकला
    पर वो ना निकले जिनके लिए जनाजा निकला
    उनका घर आते ही दोस्त सिटी बजाने लगे
    रख मेरा जनाजा उसे पटाने लगे

    टिप्पणी द्वारा ASHOK | अक्टूबर 7, 2008 | प्रतिक्रिया

  8. नजर में हूर उतरे और सुखन से नूर बरसे
    मुकाबिल हो अगर गर्दूं समझ लेना कि होली है
    बधाई रंग-ऐ-मौसम की हवाएं गोद भर लायें
    कलम जब रंग बरसाए ,समझ लेना कि होली है

    टिप्पणी द्वारा imnirbhay | मार्च 14, 2009 | प्रतिक्रिया

  9. dost main apna bhi blog hindi main banana chahta hoo par mujhe karna nahi aa raha kya aap meri madad kar sakte ho

    टिप्पणी द्वारा imnirbhay | मार्च 14, 2009 | प्रतिक्रिया

    • मेरे ब्लॉग को पढने के लिए आपका शुक्रिया.. WordPress के मुख्य प्रष्ठ पे जाकर आप भी अपना ब्लॉग शुरू कर सकते हैं.. आपको मेरी तरफ से शुभकामनाये.. 🙂

      टिप्पणी द्वारा Raj Gaurav | अक्टूबर 22, 2011 | प्रतिक्रिया

  10. preet ki peer ko jab se dil se laga rakha hai,
    bhawo ka ankaha sa sansar saja rakha hai,
    tanhaiyan hi jab muqaddar hai mara ,
    tanhaiyon ko hi hamsafar bana rakha hai…..

    टिप्पणी द्वारा subhi | जून 18, 2009 | प्रतिक्रिया

  11. thanks Raj,
    anjam uske haath hai, aaghaz kar ke dekh,
    bheege hue paro se bhi parvaaz kar ke dekh
    subhi

    टिप्पणी द्वारा subhi | जुलाई 1, 2009 | प्रतिक्रिया

  12. botot khubshurat he ap ki shayri

    टिप्पणी द्वारा ashish phulre | अगस्त 4, 2009 | प्रतिक्रिया

  13. apne matlab ke watan se hamne aashmano se hamne kuchh nahi manga,
    manga hai to gulshan ki khair mangi hai koi chasmetaj nahi manga

    टिप्पणी द्वारा kumar gaurav | अगस्त 14, 2009 | प्रतिक्रिया

  14. khuda ka shukra hai
    varna kaise gujarti sham
    sharab banane vale ko mera shalam

    टिप्पणी द्वारा dayashankar | अगस्त 16, 2009 | प्रतिक्रिया

  15. jine ki shart badi jalim hai
    kuchha to girvi yha rakhana hoga
    chhip chhip ke he dost kabhi bikana hoga
    sab ke sab vyapari or tamashai hai
    par sabse muskurake milana hoga
    jine ki shart badi jalim hai
    kuchh to girvi yahan rakhana hoga.

    टिप्पणी द्वारा dayashankar | अगस्त 16, 2009 | प्रतिक्रिया

  16. hi

    टिप्पणी द्वारा avneesh yadav | अगस्त 11, 2010 | प्रतिक्रिया

  17. tumse badhakar gulab kya hoga
    husna ye shayyat ka shabab kya hoga
    tum to har sawal ka jabab ho
    tere sawal ka jabab kya hoga

    realy very nice.

    टिप्पणी द्वारा Hemant | अक्टूबर 4, 2010 | प्रतिक्रिया

  18. pyar aur nafrat dono alag alag hai jab logo se pucha jaye ki pyar aur nafrat mai kaun sa acha hai to wo khege ki pyar acha hai…
    chahe wo insan ka insan ke sath ho ya janwar ka janwar ke sath…pyar hr jagh hailekin log nafrat ko nafrat ki najr se kyo dekhte hai????????maine to aki bar mafrat ko pyar mai aur pyar ko nfrat mai bdlte dekha hai to phir ye nafrat aur pyar alag alag kaise ./????
    ek bar tulsidas apni wife se itna pyar krte the ki unhe baki kuch acha hi ni lagta tha .. na to unhe apne ma bap ki tensin thi na apne study ki..wo apni wife se itna pyar krne lge the ki yhi pyar unhe duba rha tha..ek din unhi ki wife ne unse nfrat krna start kr diya aur tulsidas ko ye pta chla ki ki pyar hi sb kuch ni hota ..apni wife ke nafrat ke karan hi tulsidas bdal gye agr tulsidas ki wife unse nafrat na krti to aaj humlog tulsidas ko jan ni pate ,,,
    to shayad yha pr to nafrat hi achi hai.. god ne sbki limit declear krdi hai
    pyar ki apni limit ahi aur nafrat ki apni limit jb pyar apni limit cross krdeta hai yhi pyar nafrat mai bdal jata hai

    टिप्पणी द्वारा vikas chaturvedi | जुलाई 30, 2011 | प्रतिक्रिया

  19. good

    टिप्पणी द्वारा Rajnish tiwari | सितम्बर 20, 2011 | प्रतिक्रिया

  20. It is very good and intresting.

    टिप्पणी द्वारा sagar pakhale. | अक्टूबर 25, 2011 | प्रतिक्रिया

  21. very good

    टिप्पणी द्वारा swami suraj jha | फ़रवरी 20, 2012 | प्रतिक्रिया

  22. good.
    and happy holi 2 all f u

    टिप्पणी द्वारा राजपूत शानू सिंह | मार्च 7, 2012 | प्रतिक्रिया

  23. wah, kya kavita hai padkar maza aa gaya 8128266656

    टिप्पणी द्वारा K.K. SINGH | अप्रैल 13, 2012 | प्रतिक्रिया

  24. manna pdega gnab kya kvita hai

    टिप्पणी द्वारा payal | अप्रैल 28, 2013 | प्रतिक्रिया

  25. Real u ryt speak

    टिप्पणी द्वारा Teekooram panwar | जून 13, 2013 | प्रतिक्रिया

  26. good

    टिप्पणी द्वारा mohanlal | नवम्बर 30, 2013 | प्रतिक्रिया

  27. ओ मेरे देश
    तेरे हाथों की लकीरों को
    सम्भाले रखना
    मैं मतदान करने जा रहा हूँ

    मंगल राहु केतु
    दिशा बदलने में लगे हैं
    न जाने तेरे भाग्य के
    किस कोने में पड़े हैं

    कर्म किये जा
    फल की चिंता मत कर
    हम देश वासियों को
    संस्कार ये मिलें हैं

    मतदान का पावन पर्व
    नेताओं को फलता होगा
    सुनहरी धुप को सहते सहते
    हम कतार में खड़े हैं

    ओ मेरे देश
    तेरे हाथों की लकीरों को
    सम्भाले रखना
    मैं मतदान करने जा रहा हूँ

    टिप्पणी द्वारा Ashok Ajmera | अप्रैल 14, 2014 | प्रतिक्रिया

  28. VERY NICE.

    टिप्पणी द्वारा SANUK LAL YADAV | फ़रवरी 24, 2015 | प्रतिक्रिया

  29. अभी कुछ अच्छी शायरी मिल जाये तो कुछ टिप्पणी लिखें

    टिप्पणी द्वारा प्रकाश कुमार | मार्च 14, 2015 | प्रतिक्रिया

  30. Athiti

    टिप्पणी द्वारा manish | जनवरी 13, 2016 | प्रतिक्रिया

  31. हम स्वंय को कवि नहीं कहते अपितु उस साहित्य सागर का एक बूंद अवश्य मानते हैं जो अपने अस्तित्व से सागर का आभास करा देता है! मैं लिखता हूँ शेर,गज़ल,कविता,कहानी,संस्मरण इत्यादि!

    टिप्पणी द्वारा नीरज श्रीवास्तव'आलोक' | मई 1, 2016 | प्रतिक्रिया

  32. पल भर के लिए सही दिल में झांक ले,
    नादानी में ना सही जवानी में थाम ले ।

    आंसु की सागर बह रही है तुम बिन,
    सांसे थमे थमे से लगते है तुम बिन,
    थके हारे सोये है हर रात तुम बिन,
    सपने अधुरे,अधुरे से लगते है तुम बिन ।

    कंठ से गुनगुनाता रहता हू गजले प्यार के
    पर मेरे गजल अधुरे है जिस प्यार यार के,
    दिनरात अलफाज कहता रहा हू प्यार के,
    दिल थके थके से लगते है जिस प्यार यार के ।

    पल भर के लिए हि सही दिल में झांक ले,
    नादानी में ना ही सही जवानी में थाम ले ।

    लफ्ज बयॉ कर रही अधुरे ख्वाब मेरे
    माहोल जया कर रही है अधुरे ख्वाब मेरे
    तुम बिऩ़़……….।

    तुम बिन
    देव़चंद धनकर ।

    टिप्पणी द्वारा Devchand dhankar | फ़रवरी 15, 2017 | प्रतिक्रिया


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