शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

मुझको..

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गुमनामियों मे रहना, नहीं है कबूल मुझको..
चलना नहीं गवारा, बस साया बनके पीछे..

वोह दिल मे ही छिपा है, सब जानते हैं लेकिन..
क्यूं भागते फ़िरते हैं, दायरो-हरम के पीछे..

अब “दोस्त” मैं कहूं या, उनको कहूं मैं “दुश्मन”..
जो मुस्कुरा रहे हैं,खंजर छुपा के अपने पीछे..

तुम चांद बनके जानम, इतराओ चाहे जितना..
पर उसको याद रखना, रोशन हो जिसके पीछे..

वोह बदगुमा है खुद को, समझे खुशी का कारण..
कि मैं चेह-चहा रहा हूं, अपने खुदा के पीछे..

इस ज़िन्दगी का मकसद, तब होगा पूरा “नीरज”..
जब लोग याद करके, मुस्कायेंगे तेरे पीछे..

—“नीरज”..

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जनवरी 18, 2007 - Posted by | शायरी, हिन्दी

10 टिप्पणियाँ »

  1. आपका प्रयास अच्छा है, काफ़ियों पर एक बार पुन: ध्यान दें

    टिप्पणी द्वारा राकेश खंडेलवाल | जनवरी 18, 2007 | प्रतिक्रिया

  2. यह किनकी पंक्तियाँ हैं? आपने नाम नीरज लिखा है, क्या आप गोपालदास ‘नीरज’ जी के बारे में कह रहे हैं?

    टिप्पणी द्वारा समीर लाल | जनवरी 19, 2007 | प्रतिक्रिया

  3. समीर जी, नीरज एक नया शायर है..

    पढ्ने के लिये शुक्रिया.. 🙂
    राज गौरव..

    टिप्पणी द्वारा Raj Gaurav | जनवरी 19, 2007 | प्रतिक्रिया

  4. Achhi shayari hai…

    टिप्पणी द्वारा manya | जनवरी 19, 2007 | प्रतिक्रिया

  5. जो भविष्य की अवधारणाओं को मन
    की कोटियों में समेट कर चलता है,
    यही अच्छे शायर की निशानी है।मन में
    लगन की आग को क्या जलाया मैं तो
    सन्नाटों में भी निर्माण करने लगा॥

    टिप्पणी द्वारा Divyabh | जनवरी 19, 2007 | प्रतिक्रिया

  6. hi

    टिप्पणी द्वारा tarang | जुलाई 28, 2008 | प्रतिक्रिया

  7. Hi
    MUJHE SAYARI BAHUT

    टिप्पणी द्वारा tarang | जुलाई 28, 2008 | प्रतिक्रिया

  8. पेहली नज़र में.. कैसा जादू कर दिया..
    तेरा बन बैठा है, मेरा जिया..
    जाने क्या होगा..
    क्या होगा.. क्या पता..
    इस पल को मिलके.. आ जी ले ज़रा..
    मैं हूं यहां.. तू है यहां..
    मेरी बाहों मैं आ.. आ भी जा..

    ओ जानेजां.. दोनो जहां.. मेरी बाहों मैं आ.. भूलजा..

    हर दुआ मे शामिल तेरा प्यार है..
    बिन तेरे लम्हा भी दुशवार है..
    धड्कनों को तुझसे ही दरकार है..
    तुझसे हैं राहतें.. तुझसे है चाहतें..

    तू जो मिली एक दिन मुझे.. मैं कहीं हो गया लापता..

    ओ जानेजां.. दोनो जहां.. मेरी बाहों मैं आ.. भूलजा..

    कर दिया दीवाना दर्द-ए-कश ने..
    चैन छीना इश्क के एह्सास ने..
    बेख्याली दी है तेरी प्यास ने..
    छाया सुरूर है.. कुछ तो ज़रूर है..

    ये दूरियां जीने ना दें.. हाल मेरा तुझे ना पता..

    ओ जानेजां.. दोनो जहां.. मेरी बाहों मैं आ.. भूलजा..

    टिप्पणी द्वारा faria | अगस्त 19, 2008 | प्रतिक्रिया

  9. goo songs

    टिप्पणी द्वारा RANA | सितम्बर 5, 2008 | प्रतिक्रिया

  10. Nice Collection

    टिप्पणी द्वारा Mannu | सितम्बर 18, 2009 | प्रतिक्रिया


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