शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

प्यार के पल..

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हम रहें या न रहें कल, कल याद आयेंगे ये पल..
पल ये हैं प्यार के पल.. चल आ मेरे संग चल..
चल सोचें क्या.. छोटी सी है ज़िन्दगी..
कल मिल जायें, तो होगी खुश-नसीबी..
हम रहें या न रहें.. कल याद आयेंगे येह पल..

हम रहें या न रहें कल, कल याद आयेंगे ये पल..
पल ये हैं प्यार के पल.. चल आ मेरे संग चल..
चल सोचें क्या.. छोटी सी है ज़िन्दगी..
कल मिल जाये, तो होगी खुश-नसीबी..
हम रहें या न रहें.. कल याद आयेंगे ये पल..

शाम का आंचल ओढ के अयी.. देखो वो रात सुहानी..
आ लिखदें हम दोनो मिलके.. अपनी ये प्रेम कहानी..

हम रहें या न रहें.. कल याद आयेंगे ये पल..

आने वाली सुबह जाने, रंग क्या लाये दीवानी..
मेरी चाहत को रख लेना, जैसे कोई निशानी..
हम रहें या न रहें.. याद आयेंगे ये पल..

हम रहें या न रहें कल, कल याद आयेंगे ये पल..
पल येह हैं प्यार के पल.. चल आ मेरे संग चल..
चल सोचें क्या.. छोटी सी है ज़िन्दगी..
कल मिल जायें, तो होगी खुश-नसीबी..

हम रहें या न रहें.. कल याद आयेंगे ये पल..
———————————————प्यार के पल.. 

इसे “सुनें“/”देखें“..

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जनवरी 7, 2007 - Posted by | गीत, हिन्दी

22 टिप्पणियाँ »

  1. काफी सुंदर अह्सास हैं। राज जी, चिट्ठे के लेआउट के हिसाब से ऊपर घड़ी वाली इमेज बहुत बढ़ी हो गई है। मेरा सुझाव है कि पोस्ट एडीटर में जाकर इमेज रीसाइज कर लें।

    टिप्पणी द्वारा Shrish | जनवरी 7, 2007 | प्रतिक्रिया

  2. “हम रहें या न रहें.. कल याद आयेंगे ये पल”

    –ऐसे ही लाते रहें ढ़ूंढ ढ़ूंढ कर. सही है.

    टिप्पणी द्वारा समीर लाल | जनवरी 7, 2007 | प्रतिक्रिया

  3. ur expression is good try hard for ur best n never forget u r handsome.

    टिप्पणी द्वारा Divyabh | जनवरी 7, 2007 | प्रतिक्रिया

  4. Achha likha hai.

    टिप्पणी द्वारा Hindi love shayari | जनवरी 28, 2007 | प्रतिक्रिया

  5. Can you tell how do type in hindi here, I know hindi typing but how to make it visible here ?

    टिप्पणी द्वारा Hindi love shayari | जनवरी 28, 2007 | प्रतिक्रिया

  6. gjjjjjjgth

    टिप्पणी द्वारा vinod | सितम्बर 26, 2007 | प्रतिक्रिया

  7. bahut acha likha ha ma apke kader karta hu firnd

    टिप्पणी द्वारा vipul thakker | जुलाई 11, 2008 | प्रतिक्रिया

  8. Bahut bindas likhte ho
    pahr kar laga ki tumahre dil me gahrai se sochne aur mahsoos karni ki kabliyat hai.

    lage raho bahut unche jaoge

    टिप्पणी द्वारा VARUN DWIVEDI | जुलाई 12, 2008 | प्रतिक्रिया

  9. love ever hurt never.

    टिप्पणी द्वारा naina | जुलाई 15, 2008 | प्रतिक्रिया

  10. .love ever hurt never.

    टिप्पणी द्वारा naina | जुलाई 15, 2008 | प्रतिक्रिया

  11. thoda aur likhana baki raha gaya

    टिप्पणी द्वारा op goud | जुलाई 20, 2008 | प्रतिक्रिया

  12. phal pyar

    टिप्पणी द्वारा milansapre | अक्टूबर 8, 2008 | प्रतिक्रिया

  13. this is trouth first love is very imprasive.i can’t belive this . i am not tell you.

    टिप्पणी द्वारा UMESH | अक्टूबर 25, 2008 | प्रतिक्रिया

  14. i am abdul i study in iiht i

    टिप्पणी द्वारा abdul | अक्टूबर 29, 2008 | प्रतिक्रिया

  15. करके मोहब्बत अपनी खता हो.. ऐसा भी हो सकता है..
    वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है..
    दरवाजे पर आहट सुनके उसकी तरफ़ ध्यान क्यूं गया..
    आने वाली सिर्फ़ हवा हो.. ऐसा भी हो सकता है..
    वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है..
    अर्ज़-ए-तलब पे उसकी चुप से ज़ाहिर है इंकार मगर..
    शायद वो कुछ सोच रहा हो.. ऐसा भी हो सकता है..
    वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है..

    टिप्पणी द्वारा muzaffar | नवम्बर 2, 2008 | प्रतिक्रिया

  16. रास्तों के पत्थर ना गिरादें मुझे..
    इन लडखडाती राहों से डर के तुम्हारा हांथ मांगेगी..
    उजाले भी ऐसे मिले कि रोशनी से जल गये हम..
    इन उजालों से छिप कर कोई हसीन रात मांगेगी..
    आज़मायेगी लम्हा-लम्हा दोस्ती ये हमारी..
    वक्त की कोई घडी, वादे भरी बात मांगेगी..
    हम अकेले रहें, या रहे भीड में..
    आरज़ू दिल की तो बस तेरी मुलाकात मांगेगी..
    ज़िन्दगी के सफ़र मे, ओ मेरे हमसफ़र..
    ना जाने किस वक्त मोहब्बत, तुझसे अपने जज़बात मांगेगी..
    ये जो ज़िन्दगी की किताब है..
    ये किताब भी क्या खिताब है..
    कहीं एक हसीं सा ख्वाब है..
    कही जान-लेवा अज़ाब है..
    कहीं आंसू की है दास्तान..
    कहीं मुस्कुराहटों का है बयान..

    टिप्पणी द्वारा rajeev nikhra | नवम्बर 2, 2008 | प्रतिक्रिया

  17. veery good

    टिप्पणी द्वारा bunty | नवम्बर 10, 2008 | प्रतिक्रिया

  18. love is life & life is love.

    टिप्पणी द्वारा lata saxena | सितम्बर 14, 2010 | प्रतिक्रिया

  19. करके मोहब्बत अपनी खता हो.. ऐसा भी हो सकता है..
    वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है..
    दरवाजे पर आहट सुनके उसकी तरफ़ ध्यान क्यूं गया..
    आने वाली सिर्फ़ हवा हो.. ऐसा भी हो सकता है..
    वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है..
    अर्ज़-ए-तलब पे उसकी चुप से ज़ाहिर है इंकार मगर..
    शायद वो कुछ सोच रहा हो.. ऐसा भी हो सकता है..
    वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है.

    टिप्पणी द्वारा vyas rathore | सितम्बर 16, 2010 | प्रतिक्रिया

  20. very good write more

    टिप्पणी द्वारा Hemant | अक्टूबर 4, 2010 | प्रतिक्रिया

  21. va kiya sayri he

    टिप्पणी द्वारा ameer | फ़रवरी 1, 2011 | प्रतिक्रिया

  22. […] प्यार के पल.. […]

    पिंगबैक द्वारा प्यार के पल. | Muskan | जून 12, 2012 | प्रतिक्रिया


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