शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

सयीद राही..

 

आंख जब भी बंद किया करते हैं..
सामने आप हुआ करते हैं..

आप जैसा ही मुझे लगता है..
ख्वाब मे जिससे मिला करते हैं..

तू अगर छोडके जाता है तो क्या..
हादसे रोज़ हुआ करते हैं..

नाम उनका ना, कोई उनका पता..
लोग जो दिलमे रहा करते हैं..

हमने “राही” का चलन सीखा है..
हम अकेले ही चला करते हैं..

— सयीद राही.. 

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दिसम्बर 18, 2006 - Posted by | शायरी, हिन्दी

5 टिप्पणियाँ »

  1. सुन्दर ग़ज़ल है। पोस्ट करने के लिये शुक्रिया।

    टिप्पणी द्वारा Laxmi N. Gupta | दिसम्बर 19, 2006 | प्रतिक्रिया

  2. वाह राज, सुंदर प्रस्तुति…क्या पढते हो यार…सही निकाल निकाल कर लाते हो. जारी रहो.

    टिप्पणी द्वारा समीर लाल | दिसम्बर 19, 2006 | प्रतिक्रिया

  3. Peenaaz Masani ka ek album jo behad lokpriya hua tha usmein ye ghazal shamil thi. Shukriya yahan share karne ka.

    टिप्पणी द्वारा मनीष | दिसम्बर 19, 2006 | प्रतिक्रिया

  4. मंजिले मिल जाती है बस पाने की चाह हो,
    करते रहना तुम कोशिशे कितनी भी कठिन राह हो….

    टिप्पणी द्वारा digvijay | अक्टूबर 24, 2007 | प्रतिक्रिया

  5. तीच्या सोबत बोलताना शबदच संपतात..
    ती गेल्यावर नको-नको ते आठवतात…
    तीला वाटत माझ्या जवळ शब्दच नसतात,
    पण तीला कोण सांगणार, तीच्या स्तुती मधे
    शब्दच शुन्य असतात….
    प्रेम.♥
    ….प्रेम.♥
    ……..प्रेम.♥
    …………प्र ेम.♥
    …………… .प्रेम.♥
    …………प्र ेम.♥
    ……..प्रेम.♥
    ….प्रेम.♥
    प्रेम.♥

    टिप्पणी द्वारा vinayak | मार्च 9, 2012 | प्रतिक्रिया


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