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ब्राह्मण..

  brahmin.jpg

ब्राह्मण

मैं हिन्दू हूँ, जी हाँ एक हिन्दू,
कुछ गलत रुढ़ियों एवं प्रथाओं का एक बिन्दू,
हाँ मैं एक हिन्दू.
ना-ना-ना,
हिन्दू तक तो ठीक था,पर जानते नहीं,
मैं हिन्दू में ही हूँ, ब्राह्मण, पंडित, चंदनधारी,
अच्छे कर्मों का अधिकारी.
छूना मत मेरा भोजन वर्ना वह अपवित्र कहलाएगा,
मैं रह जाऊँगा भूखा-भूखा, जानते नहीं,
तूझे मेरा भोजन छिनने का पाप लग जाएगा.
मैं भी जानता हूँ, इस अन्न को तूने ही उगाया है,
कूट-पीसकर चावल बनाया है,
ये मिर्च व मसाले हैं तेरे खेत के,
नमक को भी तूने ही सुखाया है.
जहाँ तक है इस बरतन का सवाल,
तूने ही दिया इसको यह आकार.
कुछ भी हो तुम क्षुद्र ही तो हो,
पर मैं तुमसे ऊँचा हूँ, ब्राह्मण हूँ.
ये ठीक है इस कूप को खोदने में,
हर जीव को जल देने में,
तूने खून-पसीना एक किया,
पर अब अपना लोटा ना डुबा,
इस वक्त इसे ना करो अपवित्र,
पहले मुझे जल भर लेने दो,
हींकभर पी लेने दो, वर्ना
मैं जल बिन मीन हो जाऊँगा.
देखो कितनी तेज बारिश है,
मैं भीग रहा हूँ, निकलो झोपड़ी से बाहर,
मैं कैसे बैठूँ तेरे साथ, अपवित्र हो जाऊँगा.
ब्राह्मण हूँ.
मैंने कब कहा कि ये कपड़े,
जो मैंने पहने हैं, तूने नहीं बनाए,
अरे साफ कर दिए तो क्या हुआ,
यह अपवित्र हुआ ?
पर मेरे छूने से पवित्र हुआ,
मैं इतना देखता चलूँ तो पागल हो जाऊँगा,
देख ! इसे अब मत छूना,मैं ब्राह्मण हूँ.
आओ बैठो पैर दबाओ,थोड़ा ठंडा तेल लगाओ,
करो धीरे-धीरे मालिश,दूँगा तूझे ढेर आशीष,
पर तुम मुझको छूना नहीं,अपवित्र हो जाऊँगा.
ब्राह्मण हूँ.
मैं मानता हूँ, तेरे बिन मैं जी नहीं सकता,
हर वक्त,हर क्षण मुझे तेरी जरूरत है,
जबतक तू ना देता बनाकर शादी का डाल,
नहीं हो सकता मेरा शुभविवाह.
पर मैं तुमसे ऊँचा हूँ, ब्राह्मण हूँ.
मेरी माँ भी कहती थी, मेरे पैदा होने के वक्त,
तू माँ के पास रह रही थी,अरे यह क्या ?
मेरे जमीं पर गिरने के वक्त तो,
माँ दर्द से छटपटा रही थी,
उस समय तू मुझे सीने से लगाए,
प्रेम से चुमचाट रही थी.
पर देख अब मुझे मत छूना, ब्राह्मण हूँ.
मैंने धारण किए जनेऊ,माथे पर चंदन,
करुँगा प्रभु का पूजन,
पर तू कर पहले मेरा पूजन,
मैं ब्राह्मण हूँ.
मैं स्पष्ट कहता हूँ,
तेरी कृपा से ही जिंदा रहता हूँ,
पर इससे क्या,यह तेरा एहसान नहीं,
मेरा ही एहसान है तुझपर.
मैं ब्राह्मण हूँ, हूँ, हूँ. छूना मत.
अपवित्र हो जाऊँगा.

प्रभाकर पाण्डेय

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सितम्बर 27, 2006 - Posted by | कविता

24 टिप्पणियाँ »

  1. वाह ! वाक़ई काव्य का अनूठा संग्रह है यहाँ पर।

    टिप्पणी द्वारा प्रतीक पाण्डे | सितम्बर 27, 2006 | प्रतिक्रिया

  2. बहुत-बहुत धन्यवाद आपको ।
    पर मैं चाहुँगा कि मेरी एक और कविता सभ्यता की पहचान को आप यहाँ स्थान दें।

    http://prabhakargopalpuriya.blogspot.com/2006/08/blog-post_115624483520931107.html#links

    टिप्पणी द्वारा Prabhakar Pandey | अक्टूबर 2, 2006 | प्रतिक्रिया

  3. very nice and visionary poem sir!it may be very imp to make realise the so called upper caste.

    टिप्पणी द्वारा brajesh ( pandey) | नवम्बर 13, 2010 | प्रतिक्रिया

  4. nice

    टिप्पणी द्वारा brajesh ( pandey) | नवम्बर 13, 2010 | प्रतिक्रिया

  5. बहूत खुब बकवाश

    टिप्पणी द्वारा शान | फ़रवरी 6, 2011 | प्रतिक्रिया

  6. रुढ़ियोँ पर कड़ी चोट हैँ

    टिप्पणी द्वारा कमल | मार्च 20, 2011 | प्रतिक्रिया

  7. सत्य वचन बँधु सत्य वचन । इस ब्राह्मणवाद ने ही इस आर्य सभ्यता को कलँकित किया है । हर्ष होता है कि सत्यता का पुनः प्रचार हो रहा है । जातिवाद का निर्धारण कर्मगत होता है न कि जातिगत ।

    टिप्पणी द्वारा Kuldeep | नवम्बर 8, 2011 | प्रतिक्रिया

    • Keval brahman ko dosh dena bhee galat hai. Ek brahman apne ko utni baar brahman nahee kahta jitna aap log jaise baar baar kahate hai. Brahman barahmanvadi kam hota hai varan jaativati manasikata aap sabki hai. Brahman to aapki jatiwadi mansikata ka shikaar hai. Vah to swaym samajik aur sarkari upekdha ka shikaar hai. Aadhe vyaktigat aur manviy mool bhoot adhikaar sarkaar dwara chheena liya gaya hai. Aaj dalit aur koi nahee khud dalit brahman hai. Aur jatiwadee aap jaise log hain

      टिप्पणी द्वारा Santosh | सितम्बर 27, 2016 | प्रतिक्रिया

    • ब्राह्मण ने ही सभ्यता बचाकर रखी है, अन्यथा आप जैसे लोग पाप और पाखंड की हर सीमा पार कर जाते ।

      टिप्पणी द्वारा विकास | अक्टूबर 19, 2016 | प्रतिक्रिया

  8. Bahut badhiya, kadavi sachchai par chot hai. Sadhuwad.

    टिप्पणी द्वारा narendra kumar | नवम्बर 12, 2011 | प्रतिक्रिया

  9. very nice

    टिप्पणी द्वारा santosh shukla | जुलाई 15, 2012 | प्रतिक्रिया

  10. chote log ,,,choti sonch.kabhi brahmano ke un karyo ke bare me bhi likh dena jinki wajah se aj ye desh jinda hai.behuda kavita………….

    टिप्पणी द्वारा kshitij | दिसम्बर 8, 2012 | प्रतिक्रिया

    • कभी नेताओं के अच्छे कार्यो को भी गिना करो
      क्यों उनकी घोटाले और काले धन के पीछे पड़े रहते हो, है की नहीं?
      दिल्ली गैंग रेप के गुनाहगारो के भी अच्छे कामो की कभी सराहना कर लेते, है की नहीं?
      उत्तराखण्ड में पंडितो ने लोगों के नाक कान ऊँगली काट क सोने निकाल लिए। कभी उनकी भी अच्छे कर्मो को गिन लेते, है की नही?
      अरे भाई हिम्मत है तो ये कहो ना की जो लिखा है वो बिलकुल सच नहीं है ।
      और इन पंडितो को ये लगता है की सारे भगवान का ठेका इन् लोगों ने ही ले रखा है तो अच्छी बात है ना भाई । तुम्हारे भगवान से direct connection हैं। फिर क्यों रोजी रोजगार चोरी लूट मार में लगे हो।
      और अब तो पंडित सैलरी की भी डिमांड कर रहे हैं सरकार से, क्यों भगवन से भरोसा उठ गया?
      मंदिर में इनका जन्मजात आरक्षण है।

      टिप्पणी द्वारा Mmrinal | जून 23, 2015 | प्रतिक्रिया

      • Bhai chori brahman nhi krte h
        Aur hm log kbhi kuch nhi mangte mangte to app log kbhi aarachan to kbhi kuch aur hm logo m to khud m ability h isliye kbhi kuch nhi mangte app iss puri duniya app aisa koi 1 brahman dikha dna jo bikhari ho jiss k pass khane k liye na ho kyoki hm log m ability isliye app ko 1 bhi nhi milegaa

        टिप्पणी द्वारा prakhar shukla | सितम्बर 25, 2016

  11. सही बात हैं यह तो सब जानते हैं लेकिन वह जो इस बातो पर विश्वास नहीं करते उन्हे किसी ने किसी प्रकार हानियां होती रहती हैं वह व्यक्ति जो पंडित का अनादर कराता हैं वह पंडित का नाही खुदके जीवन का नाश करता हैं जो काम ईस्वर लिखे हैं, उनका पालन करना चाहिए

    टिप्पणी द्वारा vikas bhardwaj | जनवरी 6, 2015 | प्रतिक्रिया

    • Ye sab kamjor log apni kamjori chupne air sahanubhuti lene ke liye karte h .apni apagta due karna braman she sikho

      टिप्पणी द्वारा sunil kaushik | मार्च 7, 2015 | प्रतिक्रिया

  12. bhut achaa गो; पयह् इव् ग्रह्यम् ब्रह्मन गुन् कीर्त्नम्

    टिप्पणी द्वारा vivek shukla | अप्रैल 17, 2015 | प्रतिक्रिया

  13. badhiya

    टिप्पणी द्वारा manoj anuragi | जून 29, 2015 | प्रतिक्रिया

  14. क्या आपको पता है कि जैसा भोजन ब्राह्मण करता है वैसे ही सभी करते हैं क्या आप मांस को पवित्र मानते हैं .क्या आप जानते हैं ब्राह्मण हर किसी के हांथ का भोजन क्यों नही करता.

    टिप्पणी द्वारा भीष्म | अप्रैल 26, 2016 | प्रतिक्रिया

  15. मैं ब्राह्मण हूँ,
    धर्म युद्ध को सदैव तत्पर,
    कर्तव्य हेतु सदैव अग्रसर;
    परशुराम का हूँ मैं वंशज और
    उच्च कुल मैं रावण हूँ

    मैं ब्राह्मण हूँ,
    सनातनो का मैं हूँ वाहक ,
    वेद-पुरानो का मैं पालक ;
    दत्तात्रेय सा मैं हूँ श्रेष्ठ ,
    दुस्तो का हूँ मैं संहारक
    नहीं प्रशंसा का मैं चाहक,
    द्रव्यों का ना मैं ग्राहक
    समस्त जीवो में प्रभु राम
    का अति-प्रिय हूँ ;

    मैं ब्राह्मण हूँ,
    अविरल है अपनी ज्ञान की गंग,
    ब्रह्मा का मैं विशेष अंग;
    सतयुग से अब तक अभंग,
    कपट से अपने कर हैं तंग;
    जीवो के हम है आद ,
    शाश्त्रो के हम शंखनाद
    गुण में श्रेष्ठ निर्विवाद ,
    औ जन हित का मैं तोरण हूँ

    मैं ब्राह्मण हूँ,
    कर्मकांड का मैं परिचायक,
    मुक्तिमार्ग का मैं हू नायक;
    दिव्य भूमि का मैं अधिनायक,
    भक्ति भाव का मैं गायक;
    काँधे पर उपवीत रखे हूँ ,
    चोटी को निज शीश धरे हूँ ;
    सद्मार्ग पर ले जाने वाला जीवन
    का मैं आचरण हूँ!!

    मैं ब्राह्मण हूँ,……………….!!!!!!!

    टिप्पणी द्वारा मुकेश शर्मा | जुलाई 29, 2016 | प्रतिक्रिया

  16. मैं ब्राह्मण हूँ,
    कर्मकांड का मैं परिचायक,
    मुक्तिमार्ग का मैं हू नायक;
    दिव्य भूमि का मैं अधिनायक,
    भक्ति भाव का मैं गायक;
    काँधे पर उपवीत रखे हूँ ,
    चोटी को निज शीश धरे हूँ ;
    सद्मार्ग पर ले जाने वाला जीवन
    का मैं आचरण हूँ!!

    मैं ब्राह्मण हूँ,……………….!!!!!

    टिप्पणी द्वारा AKSHAY PANDEY | अगस्त 31, 2016 | प्रतिक्रिया

  17. कभी ब्राम्हण को छोड़ कर खुद पर भी कविता लिखो
    बलिदानियों में ब्राम्हण छोड़ो स्वयं भी तो आगे दिखो
    शून्य आर्यभट्ट आजादी मंगल पांडे लिखो
    रामचरित तुलसी महाभारत वेदव्यास लिखो
    जब सारा हिंदू सोया हो तो ब्राम्हण से ही आस लिखो
    जात पूछते ही तुम धर्म विरुद्ध हो जाते हो
    परंतु निज लाभ हेतु प्रमाणपत्र तुम ही तो दिखलाते हो
    क्या कहूं तुमसे मैं ब्राह्मण हूं तुम ही तो याद दिलाते हो
    70 वर्षों में तुमने कुछ तो पाया होगा
    अगर नहीं तो
    फिर क्यों तुम को आरक्षण भाया होगा
    तुम दो अपना जाति प्रमाण तो बात कही ना रूकती है
    अगर मैं कह दूं तुम्हरी वाली तो बात हमेशा उठती है
    उठो लाल कब से अपने बंद नयन को खोलो तो
    जात पात की बात छोड़ विद्वता के साथ कुछ बोलो तो
    बहुत जहर घुला अब कुछ मीठा माखन मिश्री घोलो तो
    ऊंच नीच की बात छोड़कर हिंदू होने का मान करो
    वर्ण सवर्ण छोड़कर के अब सारा हिंदुस्तान करो
    …………………………………….दिनेश

    टिप्पणी द्वारा दिनेश | फ़रवरी 18, 2017 | प्रतिक्रिया

  18. abe aukad kya h tumhari Brahmano k bina…..sale 1 rupay to jeb s niklte ni dene ko or bat krenge

    टिप्पणी द्वारा shivam | मई 13, 2017 | प्रतिक्रिया


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