शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

कभी-कभी..

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आंसू भरी ये आंखे, केहता है कभी-कभी..

गम-ए-इन्तेहां से गुज़र के, बेहता है कभी-कभी..

यादों के साथ जीने की कोशिश है उसकी..

जीने की चाह मे वो, मरता है कभी-कभी..

किसी की आरज़ू मे, सपनों को सजाया है उसने..

सपनो के सहारे वो, रोता है कभी-कभी..

नफ़रत की चादर तले, प्यार की खोज है उसकी..

प्यार उसकी ज़िन्दगी मे, आता है कभी-कभी..

कोई समझता नही है येह दर्द-ए-दिल उसका..

दर्द भी उसके दिल से दूर, जाता है कभी-कभी..

चेहरे पे मुस्कान लिये, गम छिपाया है उसने..

फ़साना-ए-दिल वोह, सुनाता है कभी-कभी..

—————————————–Author Unknown..

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सितम्बर 17, 2006 - Posted by | शायरी

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