शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

सोचा नहीं..

praying_boy

सोचा नहीं अच्छा-बुरा, देखा-सुना कुछ भी नहीं..

मांगा खुदा से रात-दिन, तेरे सिवा कुछ भी नहीं..

देखा तुझे, सोचा तुझे, चाहा तुझे, पूजा तुझे..

मेरी खता मेरी वफ़ा, तेरी खता कुछ भी नहीं..

जिस पर हमारी आंख ने मोती बिछाये रात-भर..

भेजा उन्हे कागज़ वोही, लिखा मगर कुछ भी नहीं..

मांगा खुदा से रात-दिन, तेरे सिवा कुछ भी नहीं..

एक शाम की दहलीज पर, बैठे रहे वो देर तक..

आंखों से की बातें बहुत, मुह से कहा कुछ भी नहीं..

सोचा नहीं अच्छा-बुरा, देखा-सुना कुछ भी नहीं..मांगा खुदा से रात-दिन, तेरे सिवा कुछ भी नहीं..

देखा तुझे, सोचा तुझे, चाहा तुझे, पूजा तुझे..

मेरी खता मेरी वफ़ा, तेरी खता कुछ भी नहीं..

—————————————————–बशीर बद्र..

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अगस्त 21, 2006 - Posted by | शायरी

3 टिप्पणियाँ »

  1. इसके शायर ब्शीर बद्र साहब हैं।

    टिप्पणी द्वारा जगदीश भाटिया | अक्टूबर 1, 2006 | प्रतिक्रिया

  2. शुक्रिया जगदीश जी.. 🙂

    टिप्पणी द्वारा rajgaurav | अक्टूबर 1, 2006 | प्रतिक्रिया

  3. this is such a fine ghazal from sir bashir badra. he is one of the finest shayar of the india. i would like to collect some of his famous ghazals too.

    टिप्पणी द्वारा sanjay purohit | जुलाई 10, 2007 | प्रतिक्रिया


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