भुला दो..
भुला दो- भुला दो.. वो बातें पुरानी.. जो दिलको जलाती रहीं..
वो यादें तुम्हारी.. वो बातें तुम्हारी.. जो हमको सताती रहीं..
वो कैसी सुबह थी.. खुशियों का था सफ़र..
सब यार संग थे.. कोई थी ना फ़िकर..
दुख आया.. सुख खोया.. गम बन गया हमसफ़र..
अपने क्या.. पराये क्या.. सब रंग हैं एक से..
कच्चे सब धागे हैं.. येह बंध हैं रेत के..
मंज़िल ना साथी है.. चलता हूं मैं बे-खबर..
भुला दो- भुला दो.. वो बातें पुरानी.. जो दिलको जलाती रहीं..
वो यादें.. वो बातें.. जो मुझको सताती रहीं..
————————————————————- रेयथ.. Raeth..
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किसे आवाज़ दूं.. ???
अपनी तन्हाईयों में कोई साया भी नहीं..
कोई अपना भी नहीं.. कोई पराया भी नहीं..
किसे आवाज़ दूं.. किसे आवाज़ दूं..?
सारी झूटी बातें हैं.. दिन अपने हैं ना रातें हैं..
पल-पल एक कहानी है.. जो जीवन भर दोहरानी है..
किसे आवाज़ दूं.. किसे आवाज़ दूं.. ??
चेहरे क्या तस्वीरें हैं.. ना ख्वाब हैं ना ताबीरे हैं..
आस है जो कि जीवन है.. उल्झा-उल्झा बंधन है..
किसे आवाज़ दूं.. किसे आवाज़ दूं.. ???
————————————————— अदील..
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कैसे जिया तेरे बिन..
तेरे बिन, मैं यूं कैसे जिया, कैसे जिया तेरे बिन..
तेरे बिन, मैं यूं कैसे जिया, कैसे जिया तेरे बिन..
लेकर यादें तेरी, रातें मेरी कटी..
मुझसे बातें तेरी करती हैं चांदनी..
तन्हा हैं तुझ बिन रातें मेरी..
दिन मेरे दिन के जैसे नहीं..
तन्हा बदन, तन्हा है रूह.. नम मेरी आखें रहें..
आजा मेरे अब रूबरू, जीना नही बिन तेरे..
तेरे बिन, मैं यूं कैसे जिया, कैसे जिया तेरे बिन..
कब से आखें मेरी राह मे तेरे बिछीं..
भूले से ही कभी.. तूने लजाये कहीं..
भूलें ना मुझसे बातें तेरी.. भीगी हैं हर-पल आखें मेरी..
क्युं सांस लू, क्यु मैं जियूं, जीना बुरा सा लगे..
क्युं हो गया तू बेवफ़ा, मुझको बतादे वजह..
तेरे बिन, मैं यूं कैसे जिया, कैसे जिया तेरे बिन..
तेरे बिन, मैं यूं कैसे जिया, कैसे जिया तेरे बिन..
तेरे बिन.. तेरे बिन.. तेरे बिन.. मै ऐसे जिया..
—————————————————-आतिफ़ अस्लम..
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काश..
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हर किसी का कोई होता सहारा.. हर दिल का कोई दिल होता प्यारा..
हर रात की एक सुबह होती.. फ़ूलों सा खिलता जहां..
काश.. ऐसा होता.. काश.. कोई ना रोता..
काश.. पास आकर.. काश.. कोई ना खोता..
काश कि यूं डाल पर फ़ूल मुरझाते नहीं.. काश होता रंग से ही सजा जहान..
अश्क और दर्द के लफ़्ज़ होते ही नहीं.. टूटते ना प्यार के ख्वाब फ़िर यहां..
टूटने ही थे अगर.. काश सपने ही जरा कम होते..
अपनी सारी मंजिलें काश मिल जाती हमें.. भूल हमसे ना कोई एक भी होती..
काश होता साथ ये ज़िन्दगी भर के लिये.. छूटता ना हाथ फ़िर हाथ से कभी..
जो रहा ना साथ तो.. काश अरमां भी ज़रा कम होते..
हर किसी का कोई होता सहारा.. हर दिल का कोई दिल होता प्यारा..
हर रात की एक सुबह होती.. फ़ूलों सा खिलता जहां..
काश.. ऐसा होता.. काश.. कोई ना रोता..
काश.. पास आकर.. काश.. कोई ना खोता..
———————————————विशाल डाडलानी..
ईसे “सुनें” / ”Download करें”
इस तरह आशिकी का असर छोड जाउंगा..
इस तरह आशिकी का असर छोड जाउंगा.. तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड जाउंगा..
मैं दीवाना बन गया हूं, कैसी ये मोहब्बत है.. ज़िन्दगी से बढके मुझको अब तेरी जरूरत है..
हर सांस मै अपनी तुझपे लुटाउंगा.. दिल के लहू से तेरी मांग सजाउंगा..
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड जाउंगा.. इस तरह आशिकी का असर छोड जाउंगा..
इस तरह आशिकी का असर छोड जाउंगा.. तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड जाउंगा..
प्यार क्या है.. दर्द क्या है.. दीवाने समझते हैं..
इश्क मे जलने का मतलब आशिक ही समझते हैं..
मै तडपता रहूं, तुझसे कुछ ना कहूं.. बिन कहे भी मगर, मैं तो रह ना सकूं..
इस बेखुदी मे आखिर कहां चैन पाउंगा.. मरके भी मैं तुझसे जुदा हो ना पाउंगा..
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड जाउंगा.. इस तरह आशिकी का असर छोड जाउंगा..
इस तरह आशिकी का असर छोड जाउंगा.. तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड जाउंगा..
—————— फ़िल्म: ईम्तेहान.
इसे “सुनें“.
भीगी-भीगी सी हैं..
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भीगी-भीगी सी हैं, रातें भीगी-भीगी, यादें भीगी-भीगी, बातें भीगी-भीगी.. आखों मे कैसी नमी है..
सपनॊं का साया, पलकों पे आया, पल में हंसाया, पल में रुलाया.. फ़िरभी ये कैसी कमी है..
आधी-आधी जागीं, आधी-आधी सोयीं, आंखें तेरी ये लगता है रोयीं.. ले करके नाम हमारा..
रूठा-रूठा रब, छूटा-छूटा सब, टूटा-टूटा दिल, तेरे बिना अब.. कैसे हो जीना गवरा..
ना जाने कोई.. कैसी है ये ज़िंदगानी.. ज़िंदगानी..
हमारी अधूरी कहानी..
आज जाने कि ज़िद ना करॊ..
आज जाने कि ज़िद ना करॊ..
आज जाने कि ज़िद ना करो.. यूं ही पेहलू मे बैठे रहो..
आज जाने कि ज़िद ना करॊ..
हाय मर जायेंगें.. हम तो लुट जायेंगें..
ऐसी बातें किया ना करो..
आज जाने कि ज़िद ना करॊ..
तुम ही सोचो ज़रा क्युं ना रोकें तुम्हें..
जान जाती है जब.. उठ के जाते हो तुम..
आज जाने कि ज़िद ना करो.. यूं ही पेहलू मे बैठे रहो..
आज जाने कि ज़िद ना करॊ.. आज जाने कि ज़िद ना करॊ..
वक्त की कैद में ज़िन्दगी है मगर.. चंद घडियां यही हैं जो आज़ाद हैं..
इनको खॊ कर मेरी जाने जां.. उम्र भर ना तरसते रहो..
आज जाने कि ज़िद ना करो.. आज जाने कि ज़िद ना करॊ..
हाय मर जायेंगें.. हम तो लुट जायेंगें..
ऐसी बातें किया ना करो..
आज जाने कि ज़िद ना करो.. आज जाने कि ज़िद ना करॊ..
कितना मासूम-रंगीन है येह समा.. हुस्न और इश्क की आज मेराज है..
कल की किस को खबर जाने जां.. रोक लो आज की रात को..
आज जाने कि ज़िद ना करो.. आज जाने कि ज़िद ना करॊ..
आज जाने कि ज़िद ना करो.. यूं ही पेहलू मे बैठे रहो..
आज जाने कि ज़िद ना करॊ..
हाय मर जायेंगें.. हम तो लुट जायेंगें..
ऐसी बातें किया ना करो..
आज जाने कि ज़िद ना करो.. आज जाने कि ज़िद ना करॊ..
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