क्या लिखूँ..??
कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ..
या दिल का सारा प्यार लिखूँ..
कुछ अपनो के ज़ाज़बात लिखूँ या सापनो की सौगात लिखूँ..
मै खिलता सुरज आज लिखूँ या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँ..
वो डूबते सुरज को देखूँ या उगते फूल की सांस लिखूँ..
वो पल मे बीते साल लिखूँ या सादियो लम्बी रात लिखूँ..
सागर सा गहरा हो जाऊं या अम्बर का विस्तार लिखूँ..
मै तुमको अपने पास लिखूँ या दूरी का ऐहसास लिखूँ..
वो पहली -पहली प्यास लिखूँ या निश्छल पहला प्यार लिखूँ..
सावन की बारिश मेँ भीगूँ या मैं आंखों की बरसात लिखूँ..
कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ..
या दिल का सारा प्यार लिखूँ..
— दिव्य प्रकाश..

Hi handsome…
या तो तुमने बहुत दिनों बाद लिखा है या मैं पधार राहा हूँ… बहुत अच्छी प्रस्तुति है…।
लिखते रहो…।
chha gai boss
Dhanywad apka jo apne meri kavita ko iss yogya samjha ki wo Gopal das neeraj ji ki kavita ke aas pass hai ,
thoda sa edit kar lijiye author unknown ki jageh ,mera nam divya prakash hai !!!
शुक्रिया.. आप सभी का..
बहुत अच्छी कविता हैं thanks for sharing
कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ..
या दिल का सारा प्यार लिखूँ..
कुछ अपनो के ज़ाज़बात लिखूँ या सापनो की सौगात लिखूँ..
मै खिलता सुरज आज लिखूँ या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँ..
वो डूबते सुरज को देखूँ या उगते फूल की सांस लिखूँ..
वो पल मे बीते साल लिखूँ या सादियो लम्बी रात लिखूँ..
सागर सा गहरा हो जाऊं या अम्बर का विस्तार लिखूँ..
मै तुमको अपने पास लिखूँ या दूरी का ऐहसास लिखूँ..
वो पहली -पहली प्यास लिखूँ या निश्छल पहला प्यार लिखूँ..
सावन की बारिश मेँ भीगूँ या मैं आंखों की बरसात लिखूँ..
कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ..
या दिल का सारा प्यार लिखूँ
bahut khoob likha hai aapne…aap tareef ke haqdar hai…likhte rahiye…meri tareh kai logo ko sukoon milega aap ki kavita pard kar