शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

हो सकता है..

 

करके मोहब्बत अपनी खता हो.. ऐसा भी हो सकता है..
वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है..

दरवाजे पर आहट सुनके उसकी तरफ़ ध्यान क्यूं गया..
आने वाली सिर्फ़ हवा हो.. ऐसा भी हो सकता है..
वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है..

अर्ज़-ए-तलब पे उसकी चुप से ज़ाहिर है इंकार मगर..
शायद वो कुछ सोच रहा हो.. ऐसा भी हो सकता है..
वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है..

खून-ए-तमन्ना करना उसका शेवा है मंज़ूर मगर..
हांथ मे उसके रंग-ए-हिना हो.. ऐसा भी हो सकता है..
वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है..

करके मोहब्बत अपनी खता हो.. ऐसा भी हो सकता है..
वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है..

—Author Unknown..

January 28, 2007 - Posted by Raj Gaurav | शायरी, हिन्दी | | 6 Comments

6 Comments »

  1. सुंदर शायरी पेश करने के लिए बधाई…जिसने भी कहा है बड़े दिल से कहा है!

    Comment by Divyabh | January 28, 2007

  2. Bahut hi pyari gazal
    now i am big fan of your blog…

    Comment by Nitin | January 28, 2007

  3. सुन्दर गजल

    Comment by Shrish | January 28, 2007

  4. भाड में गया गम,
    रोना कर कम,
    दम मारो दम।

    फोड खुशी के बम,
    पी सोडा या रम,
    मत कर आँखे नम,
    दम मारो दम।

    गम ना होंगे कभी कम,
    ना जाएंगे कभी थम,
    है अगर तुझमे दम,
    तो क्या है फिर ये गम,
    दम मारो दम।

    तो गुरू… हो जाओ शुरू…

    Comment by aMIT | May 19, 2007

  5. rg

    Comment by jagat pal | November 13, 2007

  6. अर्ज़-ए-तलब पे उसकी चुप से ज़ाहिर है इंकार मगर..
    शायद वो कुछ सोच रहा हो.. ऐसा भी हो सकता है..

    kya baat bahut sunder

    Comment by Shubhashish Pandey | May 10, 2008

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