प्यार के पल..
हम रहें या न रहें कल, कल याद आयेंगे ये पल..
पल ये हैं प्यार के पल.. चल आ मेरे संग चल..
चल सोचें क्या.. छोटी सी है ज़िन्दगी..
कल मिल जायें, तो होगी खुश-नसीबी..
हम रहें या न रहें.. कल याद आयेंगे येह पल..
हम रहें या न रहें कल, कल याद आयेंगे ये पल..
पल ये हैं प्यार के पल.. चल आ मेरे संग चल..
चल सोचें क्या.. छोटी सी है ज़िन्दगी..
कल मिल जाये, तो होगी खुश-नसीबी.. हम रहें या न रहें.. कल याद आयेंगे ये पल..
शाम का आंचल ओढ के अयी.. देखो वो रात सुहानी..
आ लिखदें हम दोनो मिलके.. अपनी ये प्रेम कहानी..
हम रहें या न रहें.. कल याद आयेंगे ये पल..
आने वाली सुबह जाने, रंग क्या लाये दीवानी..
मेरी चाहत को रख लेना, जैसे कोई निशानी..
हम रहें या न रहें.. याद आयेंगे ये पल..
हम रहें या न रहें कल, कल याद आयेंगे ये पल..
पल येह हैं प्यार के पल.. चल आ मेरे संग चल..
चल सोचें क्या.. छोटी सी है ज़िन्दगी..
कल मिल जायें, तो होगी खुश-नसीबी..
हम रहें या न रहें.. कल याद आयेंगे ये पल..
———————————————प्यार के पल..

काफी सुंदर अह्सास हैं। राज जी, चिट्ठे के लेआउट के हिसाब से ऊपर घड़ी वाली इमेज बहुत बढ़ी हो गई है। मेरा सुझाव है कि पोस्ट एडीटर में जाकर इमेज रीसाइज कर लें।
“हम रहें या न रहें.. कल याद आयेंगे ये पल”
–ऐसे ही लाते रहें ढ़ूंढ ढ़ूंढ कर. सही है.
ur expression is good try hard for ur best n never forget u r handsome.
Achha likha hai.
Can you tell how do type in hindi here, I know hindi typing but how to make it visible here ?
gjjjjjjgth
bahut acha likha ha ma apke kader karta hu firnd
Bahut bindas likhte ho
pahr kar laga ki tumahre dil me gahrai se sochne aur mahsoos karni ki kabliyat hai.
lage raho bahut unche jaoge
love ever hurt never.
.love ever hurt never.
thoda aur likhana baki raha gaya
phal pyar
this is trouth first love is very imprasive.i can’t belive this . i am not tell you.
i am abdul i study in iiht i
करके मोहब्बत अपनी खता हो.. ऐसा भी हो सकता है..
वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है..
दरवाजे पर आहट सुनके उसकी तरफ़ ध्यान क्यूं गया..
आने वाली सिर्फ़ हवा हो.. ऐसा भी हो सकता है..
वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है..
अर्ज़-ए-तलब पे उसकी चुप से ज़ाहिर है इंकार मगर..
शायद वो कुछ सोच रहा हो.. ऐसा भी हो सकता है..
वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है..
रास्तों के पत्थर ना गिरादें मुझे..
इन लडखडाती राहों से डर के तुम्हारा हांथ मांगेगी..
उजाले भी ऐसे मिले कि रोशनी से जल गये हम..
इन उजालों से छिप कर कोई हसीन रात मांगेगी..
आज़मायेगी लम्हा-लम्हा दोस्ती ये हमारी..
वक्त की कोई घडी, वादे भरी बात मांगेगी..
हम अकेले रहें, या रहे भीड में..
आरज़ू दिल की तो बस तेरी मुलाकात मांगेगी..
ज़िन्दगी के सफ़र मे, ओ मेरे हमसफ़र..
ना जाने किस वक्त मोहब्बत, तुझसे अपने जज़बात मांगेगी..
ये जो ज़िन्दगी की किताब है..
ये किताब भी क्या खिताब है..
कहीं एक हसीं सा ख्वाब है..
कही जान-लेवा अज़ाब है..
कहीं आंसू की है दास्तान..
कहीं मुस्कुराहटों का है बयान..
veery good