शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

पता नहीं..

 love.jpg

पता नहीं कौन से मोड पर..
ज़िन्दगी हम से तुम्हारा साथ मांगेगी..

रास्तों के पत्थर ना गिरादें मुझे..
इन लडखडाती राहों से डर के तुम्हारा हांथ मांगेगी..

उजाले भी ऐसे मिले कि रोशनी से जल गये हम..
इन उजालों से छिप कर कोई हसीन रात मांगेगी..

आज़मायेगी लम्हा-लम्हा दोस्ती ये हमारी..
वक्त की कोई घडी, वादे भरी बात मांगेगी..

हम अकेले रहें, या रहे भीड में..
आरज़ू दिल की तो बस तेरी मुलाकात मांगेगी..

ज़िन्दगी के सफ़र मे, ओ मेरे हमसफ़र..
ना जाने किस वक्त मोहब्बत, तुझसे अपने जज़बात मांगेगी..

— Author Unkown..

December 17, 2006 - Posted by Raj Gaurav | शायरी, हिन्दी | | 1 Comment

1 Comment »

  1. अच्छा है!

    Comment by समीर लाल | December 17, 2006 | Reply


Leave a comment