शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

मौला मेरे.. मौला मेरे..

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मौला मेरे.. मौला मेरे..

मौला मेरे.. मौला मेरे..

मौला मेरे.. मौला..

आंखे तेरी.. इतनी हसीन..

के इनका आशिक मैं बन गया हूं..

मुझको बसाले इनमे तू.. 

 

मुझसे ये हर घडी मेरा दिल कहे..

तुम ही हो इसकी आरज़ू..

मुझसे ये हर घडी मेरे लब कहें..

तेरी ही हो सब गुफ़्तगू..

 

बातें तेरी इतनी हसीन..

मैं याद इनको जब करता हूं..

फ़ूलों सी आये खुश्बू..

 

रख लूं छुपाके मैं कहीं, तुझको..

साया भी तेरा ना मैं दूं..

रख लूं बनाके कहीं घर मैं तुझे..

साथ तेरे मैं ही रहूं..

 

जुल्फ़ें तेरी इतनी घनी..

देखके इनको ये सोचता हूं..

साये मे इनके मैं जीयूं..

 

मौला मेरे.. मौला मेरे..

मौला मेरे.. मौल मेरे..

मेरा दिल येही बोला..

यारा राज़ ये इसने है मुझपर खोला..

के है अश्क-ए-मोहब्बत है जिसके दिल मे..

उसको पसंद करता है मौला मेरा दिल..

यही बोला..

मौला मेरे.. मौला मेरे..

मेरे मौला..

इसे सुनें

December 17, 2006 Posted by Raj Gaurav | गीत, हिन्दी | | 2 Comments

पता नहीं..

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पता नहीं कौन से मोड पर..
ज़िन्दगी हम से तुम्हारा साथ मांगेगी..

रास्तों के पत्थर ना गिरादें मुझे..
इन लडखडाती राहों से डर के तुम्हारा हांथ मांगेगी..

उजाले भी ऐसे मिले कि रोशनी से जल गये हम..
इन उजालों से छिप कर कोई हसीन रात मांगेगी..

आज़मायेगी लम्हा-लम्हा दोस्ती ये हमारी..
वक्त की कोई घडी, वादे भरी बात मांगेगी..

हम अकेले रहें, या रहे भीड में..
आरज़ू दिल की तो बस तेरी मुलाकात मांगेगी..

ज़िन्दगी के सफ़र मे, ओ मेरे हमसफ़र..
ना जाने किस वक्त मोहब्बत, तुझसे अपने जज़बात मांगेगी..

— Author Unkown..

December 17, 2006 Posted by Raj Gaurav | शायरी, हिन्दी | | 1 Comment