शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

ये जो ज़िन्दगी की किताब है..

ये जो ज़िन्दगी की किताब है.. 

ये जो ज़िन्दगी की किताब है..
ये किताब भी क्या खिताब है..
कहीं एक हसीं सा ख्वाब है..
कही जान-लेवा अज़ाब है..

कहीं आंसू की है दास्तान..
कहीं मुस्कुराहटों का है बयान..
कई चेहरे हैं इसमे छिपे हुये..
एक अजीब सा ये निकाब है..

कहीं खो दिया, कहीं पा लिया..
कहीं रो लिया..
कहीं गा लिया..
कहीं छीन लेती है हर खुशी..
कहीं मेहरबान ला-ज़वाब है..

कहीं छांव है, कहीं धूप है..
कहीं बरकतों की हैं बारिशें..
तो कहीं, और ही कोई रूप है..

ये जो ज़िन्दगी की किताब है..
ये खिताब लाजवाब है..

— राजेश रेड्डी..

इसे सुनें – जगजीत सिंह

December 15, 2006 Posted by Raj Gaurav | गज़ल, शायरी, हिन्दी | | 1 Comment