शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

वो दिल ही क्या – कतील शिफ़ाई..

 

वो दिल ही क्या जो तेरे मिलने की दुआ ना करे..

मैं तुझको भूल के ज़िन्दा रहूं, ये खुदा ना करे..

रहेगा साथ, तेरा प्यार, ज़िन्दगी बन कर..

ये और बात, मेरी ज़िन्दगी अब वफ़ा ना करे..

ये ठीक है माना, नहीं मरता कोई जुदाई में..

खुदा किसी को, किसी से जुदा ना करे..

सुना है उसको मोहब्ब्त दुआयें देती है..

जो दिल पे चोट तो खाये, पर गिला ना करे..

ज़माना देख चुका है, परख चुका है उसे..

“कातिल” जान से जाये, पर इल्तिजा ना करे..

—कतील शिफ़ाई..

इसे “सुनें” गायक – जगजीत सिंह..

December 14, 2006 - Posted by Raj Gaurav | गज़ल, शायरी, हिन्दी | | 3 Comments

3 Comments »

  1. Very nice……. I love it..
    keep writing..
    tnx
    nitin

    Comment by Nitin | December 14, 2006 | Reply

  2. अच्छा संग्रह है मिश्रा जी, वर्डप्रैस.कॉम पर shayari.wordpress.com नाम से चिट्ठा बनाने की कोशिश कर रहा था तो यहाँ पहुँचा। लिखते रहिए और गाते रहिए।

    Comment by Shrish | December 14, 2006 | Reply

  3. bahut sundar sangrh hai. dhanyvad.

    Comment by tara chandra gupata | May 9, 2009 | Reply


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