शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

बहुत है..

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जिनकी झलक मे करार बहुत है..

उसका मिलना दुशवार बहुत है..

जो मेरे हांथों की लकीरों मे नहीं..

उस से हमें प्यार बहुत है..

जिस को मेरे दिल का रास्ता भी नहीं मलूम..

इन धडकनों को उसका इंतेज़ार बहुत है..

येह हो नही सकता कि वो हमे भुला दे..

क्या करें हमे उसपे एतबार बहुत है..

——————————————–Author Unknown..

September 23, 2006 Posted by Raj Gaurav | शायरी | | No Comments Yet