एक दीप जला रखा है..
दिल की चोखट पे एक दीप जला रखा है..
तेरे लौट आने का सपना सज़ा रखा है..
सांस तक भी नहीं लेते है, तुझे सोचते वक्त..
हमने इस काम को भी, पलकों पे उठा रखा है..
रूठ जाते हो तो कुछ और हसीन लगते हो..
हमने येह सोच के ही तुमको खफ़ा रखा है..
चैन लेने नही देता येह किसी तरह से मुझे..
तेरी यादों ने जो दिल मे तूफ़ां मचा रखा है..
जाने वाले ने कहा था के वो लौट आयेगा ज़रूर..
एक इसी आस पे दरवाज़ा, हमने खुला रखा है..
तेरे जाने से जो धूल उठी थी गम की..
हमने उस धूल को, आंखों मे बसा रखा है..
मुझको कल शाम से वो बहुत याद आने लगा..
दिलने मुद्दतों से जो एक इंसान भुला रखा है..
आखिरी बार जो आया था मेरे नाम पैगाम..
मैने उसी कागज़ को दिल से लगा रखा है..
दिल की चौखट पे एक दीप जला रखा है..
—————————————–Author Unknown..
कभी-कभी..
आंसू भरी ये आंखे, केहता है कभी-कभी..
गम-ए-इन्तेहां से गुज़र के, बेहता है कभी-कभी..
यादों के साथ जीने की कोशिश है उसकी..
जीने की चाह मे वो, मरता है कभी-कभी..
किसी की आरज़ू मे, सपनों को सजाया है उसने..
सपनो के सहारे वो, रोता है कभी-कभी..
नफ़रत की चादर तले, प्यार की खोज है उसकी..
प्यार उसकी ज़िन्दगी मे, आता है कभी-कभी..
कोई समझता नही है येह दर्द-ए-दिल उसका..
दर्द भी उसके दिल से दूर, जाता है कभी-कभी..
चेहरे पे मुस्कान लिये, गम छिपाया है उसने..
फ़साना-ए-दिल वोह, सुनाता है कभी-कभी..
—————————————–Author Unknown..
