तुम आओ, तो कोई बात बने..
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तुम मेरी याद हो, मेरे पास आओ तो कोई बात बने..
तुम मेरी जान हो, यूं ज़िन्दगी मे आओ तो कोई बात बने..
तुम्हारी याद मे गुज़रा हर लम्हा मेरे दिन को मेहकाता है..
खुशबू बन मेरी सासों को मेहकाओ तो कोई बात बने..
मैं दुनिया कि नही करता परवाह, तुमको जब याद करता हूं..
कभी तुम भी रुसवाइयों को गले लगाओ तो कोई बात बने..
रकीबों को तुम्हारे बारे मे बताने मे अच्छा नहीं लगता..
कभी खुद भी आओ, मेरे हाल पे हंस जाओ, तो कोई बात बने..
कभी रूठा नही हूं तुमसे मैं इस तरह से के..
मैं तुमसे रूठ जाऊं और तुम मुझे मनाओ, तो कोई बात बने..
हमेशा खुदा से ही तुमको मांगा है शाम-ओ-सहर..
दुआ को हांथ उठे, सामने तुम्हें पाऊं, तो कोई बात बने..
कलाम रुकता नही है, याद का दरिया बह जाता है..
कभी तुम भी इस मे डूब जाओ, तो कोई बात बने..
——————————————–Author Unknown..
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