शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

तुम आओ, तो कोई बात बने..

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तुम मेरी याद हो, मेरे पास आओ तो कोई बात बने..

तुम मेरी जान हो, यूं ज़िन्दगी मे आओ तो कोई बात बने..

तुम्हारी याद मे गुज़रा हर लम्हा मेरे दिन को मेहकाता है..

खुशबू बन मेरी सासों को मेहकाओ तो कोई बात बने..

मैं दुनिया कि नही करता परवाह, तुमको जब याद करता हूं..

कभी तुम भी रुसवाइयों को गले लगाओ तो कोई बात बने..

रकीबों को तुम्हारे बारे मे बताने मे अच्छा नहीं लगता..

कभी खुद भी आओ, मेरे हाल पे हंस जाओ, तो कोई बात बने..

कभी रूठा नही हूं तुमसे मैं इस तरह से के..

मैं तुमसे रूठ जाऊं और तुम मुझे मनाओ, तो कोई बात बने..

हमेशा खुदा से ही तुमको मांगा है शाम-ओ-सहर..

दुआ को हांथ उठे, सामने तुम्हें पाऊं, तो कोई बात बने..

कलाम रुकता नही है, याद का दरिया बह जाता है..

कभी तुम भी इस मे डूब जाओ, तो कोई बात बने..

——————————————–Author Unknown..

September 12, 2006 Posted by Raj Gaurav | शायरी | | No Comments Yet

दुआ कैसे करूं..??

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सुकून-ए-दिल के लिये अब मैं दुआ कैसे करूं..

दर्द जब तूने दिया है तो गिला कैसे करूं..

अकसर लौटा हूं मंज़िल से यही सोच के मैं..

अब मुक्कमल येह सफ़र, तेरे बिना कैसे करूं..

मेरे शेरों मे येह असर कहां था पेहले..

कर्ज़ मैं तेरी ज़फ़ाओं का अदा कैसे करूं..

ज़िन्दगी भर की वफ़ायों का सिला है यारों..

इस दर्द की दवा कैसे करूं..

थी कोई मेरे हाथों की लकीरों मे कमी..

अपनी तकदीर का अब तुझसे गिला कैसे करूं..

मेरी नस-नस मे बसा है जो लहू बनके दोस्त..

उसकी यादों से किनारा कैसे करूं..

अब मुनासिब है येह कि उसको भुला दूं “मैं”..

हां, मगर फ़ूल को खुशबू से जुदा कैसे करूं..

—————————————-Author Unknown..

September 12, 2006 Posted by Raj Gaurav | शायरी | | No Comments Yet