शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

भुला दो..

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भुला दो- भुला दो.. वो बातें पुरानी.. जो दिलको जलाती रहीं..

वो यादें तुम्हारी.. वो बातें तुम्हारी.. जो हमको सताती रहीं..

वो कैसी सुबह थी.. खुशियों का था सफ़र..

सब यार संग थे.. कोई थी ना फ़िकर..

दुख आया.. सुख खोया.. गम बन गया हमसफ़र..

अपने क्या.. पराये क्या.. सब रंग हैं एक से..

कच्चे सब धागे हैं.. येह बंध हैं रेत के..

मंज़िल ना साथी है.. चलता हूं मैं बे-खबर..

भुला दो- भुला दो.. वो बातें पुरानी.. जो दिलको जलाती रहीं..

वो यादें.. वो बातें.. जो मुझको सताती रहीं..

————————————————————- रेयथ.. Raeth..

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September 5, 2006 - Posted by Raj Gaurav | गीत, शायरी | | No Comments Yet

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