शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

कुछ बातें मेरे बचपन की..

 बचपन..

कुछ बातें मेरे बचपन की..

कुछ यादें मेरे बचपन की..

वो बचपन था बस गुज़र गया..

कुछ खुशियां थीं.. कुछ गम भी थे..

चंद लम्हे थे जो बीत गये..

कुछ लोग भी हम से बिछड गये..

अब लौट के फ़िर ना आयेंगे..

चंद लम्हे थे जो बीत गये..

कुछ बातें मेरे बचपन की..

कुछ यादें मेरे बचपन की..

———————————Author Unknown..

September 3, 2006 Posted by Raj Gaurav | कविता, शायरी | | No Comments Yet

हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती..

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लेहरों से डरकर नौका पार नहीं होती..

हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती..

नन्ही चींटीं जब दाना लेकर चढती है..

चढती दीवारों पर सो बार फ़िसलती है..

मनका विश्वास रगॊं मे साहस भरता है..

चढकर गिरना, गिरकर चढना ना अखरता है..

मेहनत उसकी बेकार हर बार नहीं होती..

हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती..

डुबकियां सिंधुमें गोताखोर लगाता है..

जा जा कर खाली हांथ लौटकर आता है..

मिलते ना सहज ही मोती गेहरे पानी में..

बढता दूना विश्वास इसी हैरानी में..

मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती..

हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती..

असफ़लता एक चुनौती है.. स्वीकार करो..

क्या कमी रेह गयी देखो और सुधार करो..

जब तक ना सफ़ल हो नींद-चैन को त्यागो तुम..

संघर्षोंका मैदान छोड मत भागो तुम..

कुछ किये बिना ही जयजयकार नहीं होती..

हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती..

——————————————कवी श्रीयुत हरिवंश राय बच्चन..

September 3, 2006 Posted by Raj Gaurav | कविता | | No Comments Yet

मैं..

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किसी दिन तेरे दिलमें उतर जाऊंगा..

मैं तो लम्हा हूं, तुझे छूके गुज़र जाऊंगा..

तेरी ज़िन्दगी मे कोई रंग भर जाऊंगा..

चल पडा हूं जो, तुझसे मिलकर ही जऊंगा..

दुनिया को पीछे छोडकर, पहुंचा हूं तेरे पास..

तेरी आंखों से ओझल हुआ, तो किधर जाऊंगा..

अपनी नज़रों का दायरा बुनलो मेरे आस-पास..

वरना इन तेज़ हवाओं में बिखर जाऊंगा..

कौन खुशबू को हवा से जुदा करेगा..

तू मेरे साथ रहेगी, मैं जिधर जाऊंगा..

चांद-तारों की तरह मैं भी हूं गर्दिश में..

हां, अगर तूने पुकारा तो टूट आऊंगा..

———————————————Author Unknown..

September 3, 2006 Posted by Raj Gaurav | शायरी | | No Comments Yet