शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

तन्हाई..

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मेरे बाद किधर जायेगी तन्हाई..
मैं जो मरा तो मर जायेगी तन्हाई..

मै जब रो-रो के दरिया बन जाउंगा..
उस दिन पार उतर जायेगी तन्हाई..

तन्हाई को घर से रुखसत तो कर दूं..
सोचूं, किस के घर जायेगी तन्हाई..

वीराना हूं, आबादी से आया हूं..
देखेगी तो डर जायेगी तन्हाई..

यूं आओ के पाओं की भी आवाज़ ना हो..
शोर हुआ तो मर जायेगी तन्हाई..
—————————————–ज़फ़र गोरखपुरी

August 28, 2006 - Posted by Raj Gaurav | शायरी | | No Comments Yet

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