किसे आवाज़ दूं.. ???
अपनी तन्हाईयों में कोई साया भी नहीं..
कोई अपना भी नहीं.. कोई पराया भी नहीं..
किसे आवाज़ दूं.. किसे आवाज़ दूं..?
सारी झूटी बातें हैं.. दिन अपने हैं ना रातें हैं..
पल-पल एक कहानी है.. जो जीवन भर दोहरानी है..
किसे आवाज़ दूं.. किसे आवाज़ दूं.. ??
चेहरे क्या तस्वीरें हैं.. ना ख्वाब हैं ना ताबीरे हैं..
आस है जो कि जीवन है.. उल्झा-उल्झा बंधन है..
किसे आवाज़ दूं.. किसे आवाज़ दूं.. ???
————————————————— अदील..
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