शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

दोस्ती..

frnds.jpg

दोस्ती नाम नहीं सिर्फ़ दोस्तों के साथ रेहने का..
बल्की दोस्त ही जिन्दगी बन जाते हैं, दोस्ती में..

जरुरत नहीं पडती, दोस्तों की तस्वीर की.
देखो जो आईना तो दोस्त नज़र आते हैं, दोस्ती में..

येह तो बहाना है कि मिल नहीं पाये दोस्तों से आज..
दिल पे हाथ रखते ही एहसास उनके हो जाते हैं, दोस्ती में..

नाम की तो जरूरत ही नहीं पडती इस रिश्ते मे कभी..
पूछे नाम अपना ओर, दोस्तॊं का बताते हैं, दोस्ती में..

कौन केहता है कि दोस्त हो सकते हैं जुदा कभी..
दूर रेह्कर भी दोस्त, बिल्कुल करीब नज़र आते हैं, दोस्ती में..

सिर्फ़ भ्रम है कि दोस्त होते हैं अलग-अलग..
दर्द हो इनको ओर, आंसू उनके आते हैं , दोस्ती में..

माना इश्क है खुदा, प्यार करने वालों के लिये “अभी”
पर हम तो अपना सिर झुकाते हैं, दोस्ती में..

ओर एक ही दवा है गम की दुनिया में क्युकि..
भूल के सारे गम, दोस्तों के साथ मुस्कुराते हैं, दोस्ती में..

————————————————-अभिनव जैन..

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अगस्त 24, 2006 - Posted by | कविता

40s टिप्पणियाँ »

  1. i also like to write poetry.
    but now i dnt have time to write such a thing.

    Comment by abhinav tyagi | अप्रैल 3, 2008 | Reply

    • Dear Abhinav,

      There is always room at the top then how come you posess a talent for which many of us do want but cannot. It is disappointing one self by denying lack of time for pursuing your hobby?

      Comment by Goupal Rai | नवम्बर 17, 2009 | Reply

  2. beautiful…plz post more on friendship….this is ultimate

    Comment by rakesh raina | मई 12, 2008 | Reply

    • chad se pyari chadni
      chadni se pyari rat
      rat se pyari aap

      Comment by rajeev pandey | जुलाई 30, 2009 | Reply

  3. ILOVE MA SUNITA SHA PAR KHATA HO APA

    Comment by dilip | अगस्त 11, 2008 | Reply

  4. नाम की तो जरूरत ही नहीं पडती इस रिश्ते मे कभी..
    पूछे नाम अपना ओर, दोस्तॊं का बताते हैं, दोस्ती में..

    कौन केहता है कि दोस्त हो सकते हैं जुदा कभी..
    दूर रेह्कर भी दोस्त, बिल्कुल करीब नज़र आते हैं, दोस्ती में..

    सिर्फ़ भ्रम है कि दोस्त होते हैं अलग-अलग..
    दर्द हो इनको ओर, आंसू उनके आते हैं , दोस्ती में..

    Comment by Ramlla Singh | सितम्बर 9, 2008 | Reply

  5. मैं भी लिखता हूं.. पर चिन्ता ना करें आपको ऐसा torture नहीं दूंगा मैं यहां पे.. इस ब्लोग पे चुने हुए अच्छे-अच्छे शेर.. शायरी.. या गीत.. लिखने के नेक इरादे से आप सभी का स्वागत करता हूं..

    Comment by Ramlla Singh | सितम्बर 9, 2008 | Reply

  6. की…
    डार्लिंग चाय तो पी लो,
    जल्दी से रेडी हो जाओ,
    आप को ऑफिस भी है जाना…

    घरवाली भगवान का रुप ले कर आयी थी,
    दिल और दिमाग पर पूरी तरह छाई थी,
    सांस भी लेते थे तो नाम उसी का होता था,
    इक पल भी दूर जीना दुश्वार होता था…

    ५ साल बाद……..

    सुबह सुबह मैडम का चाय ले कर आना,
    टेबल पर रख कर जोर से चिल्लाना,
    आज ऑफिस जाओ तो मुन्ना को
    स्कूल छोड़ते हुए जाना…

    सुनो एक बार फिर वोही आवाज आयी,
    क्या बात है अभी तक छोड़ी नही चारपाई,
    अगर मुन्ना लेट हो गया तो देख लेना,
    मुन्ना की टीचर्स को फिर खुद ही संभाल लेना…

    ना जाने घरवाली कैसा रुप ले कर आयी थी,
    दिल और दिमाग पर काली घटा छाई थी,
    सांस भी लेते हैं तो उन्ही का ख़याल होता है,
    अब हर समय जेहन में एक ही सवाल होता है…

    क्या कभी वो दिन लौट के आएंगे,
    हम एक बार फिर कुंवारे हो जायेंगे….

    Comment by mahir tyagi | सितम्बर 23, 2008 | Reply

  7. aap ne hamari dosti kabool ki uske liye
    …………………….thanks
    and aap ne abhi tak interodunction nahi diya
    humne aap ke kahne par aap ko poora introdunction diya

    ……………..please give me your intro.

    aur aise hi e-mail karte raho tabhi to dosti parvan chadhegi yaar

    Comment by mahir tyagi | सितम्बर 23, 2008 | Reply

  8. hy kya khoob likha hai

    Comment by firoj | दिसम्बर 22, 2008 | Reply

  9. when u look at me*`•.¸.♥♥
    ♥♥*`•.¸ .i feel i m fine*`•.¸.♥♥

    ♥♥*`•.¸ .when u call me
    *`•.¸.♥♥
    ♥♥*`•.¸. i feel i m good
    *`•.¸.♥♥

    ♥♥*`•.¸ .when u ask me
    *`•.¸.♥♥
    ♥♥*`•.¸ .i feel i m intelligent
    *`•.¸.♥♥

    ♥♥*`•.¸ .when u see me
    *`•.¸.♥♥
    ♥♥*`•.¸ .i feel i m beautiful
    *`•.¸.♥♥

    ♥♥*`•.¸ .when u give me smile
    *`•.¸.♥♥
    ♥♥*`•.¸ .i feel i m happy
    *`•.¸.♥♥

    ♥♥*`•.¸ .when u touch me
    *`•.¸.♥♥
    ♥♥*`•.¸ .i feel i m alive
    *`•.¸.♥♥

    ♥♥*`•.¸ .when u talk with me
    *`•.¸.♥♥
    ♥♥*`•.¸ .i feel i m someone Special
    *`•.¸.♥♥

    ♥♥*`•.¸ .and finally when u r not with me
    *`•.¸.♥♥
    ♥♥*`•.¸ .i feel i m NOTHING*`•.¸.♥♥

    Comment by rajeev pandey | जुलाई 30, 2009 | Reply

  10. bahut achchha laga dosto ki filings jajne or likhane ke liye
    thanks

    Comment by dayashankar | अगस्त 16, 2009 | Reply

  11. DOSTI INSAAN KI JARURAT HAI!
    DILO PER DOSTI KI HUKUMAT HAI!
    AAP KE PYARE KI VAJAH SE JINDA HOIN!
    VERNA KHUDA KO BHI HAMARI JARURAT HAI!

    Comment by NAVEEN | अगस्त 20, 2009 | Reply

    • hh

      Comment by raj | अप्रैल 6, 2010 | Reply

  12. phir na semtagi ager dosti bikher jayegi
    jindagi julph nahi jo phir se sanwer jayegi
    jo khusi de tumhe tham lo daman ushka
    jindagi roker nahi hansa ker gujer jayegi

    Comment by naveen singh | अगस्त 22, 2009 | Reply

  13. u r nice
    kisi se itna vada na karo jisa tum nibha na sako kisi ko tum itna na cho jisa tum pa na sako, pyar kisi ka kaha pura hota hai, koya ki is ka phela word khud hi adhur hota hai.

    Comment by krishna sharma | अगस्त 27, 2009 | Reply

  14. aap logon ki shari padh ker bahut hi accha lag main chah ta hoon ki aaplog isse bhi achchi shari likhen

    Comment by sabir hussain | अगस्त 31, 2009 | Reply

  15. 81237

    Comment by sabir hussain | अगस्त 31, 2009 | Reply

  16. EK LADKI THI DIWANI
    MOBILE LEKAR GUMTI THI
    NAZRE JUKAKAR SHRMAKE
    MOBILE PE KUCH KUCH KARTI THI
    JAB BHI MUJSE MILA KARTI
    TAB EK HI SAWAL KARTI THI
    YE CHALU KESE HOTA HAI………..

    Comment by rushikesh kagde | सितम्बर 4, 2009 | Reply

  17. hi,
    deepika tum janha hbi raho muskaraate rahna
    tumhari yaad bahut aati hai agar c me dekhana to msg
    jaroor karna good bye bye god by gress;
    thank you
    m. k. rai
    a.c.s.t. coledge
    jabalpur

    Comment by manish rai | सितम्बर 4, 2009 | Reply

  18. hello every body,
    I am also alone in my life, But i have a good friend in my life, who help me alwayas and distrub me, So very very thank for friendship and my friend
    S. Khan

    Comment by arun | सितम्बर 7, 2009 | Reply

  19. kuch aisa khayal jo harek ki zindgi me aata hai
    sayad har kishi ko likh dena mumkin nahi hopata
    kosis ki hai aap ko apna sa lage bataega ye kabhi na kabhi
    zindgi me bhoole visre yad ate hai

    thanks

    Comment by shiv kumar dubey | सितम्बर 11, 2009 | Reply

  20. dear sunil jaha vi raho khush rahna mere dost

    shiv kumar dubey
    sagar mp

    Comment by shiv kumar dubey | सितम्बर 11, 2009 | Reply

  21. mat kar mere dost hasheno se pyar
    bo ankhon se var karti hai
    mene isi ankhon se dekha
    ki bo kitno se pyar karti hai

    thanks
    shiv kumar dubey
    +919702258074

    Comment by shiv kumar dubey | सितम्बर 11, 2009 | Reply

  22. dear everivody
    (3)sawal aap ke liye
    (1) ek din ki zindgi mile to kya chahoge
    (2)agar mout samne ho to kya magoge
    (3)dost ur pyar me kya chahoge

    thanks
    shiv kumar dubey
    09702258074

    Comment by shiv kumar dubey | सितम्बर 11, 2009 | Reply

    • DOSTI MAGENGE

      Comment by PRAVENDRA | फ़रवरी 13, 2012 | Reply

  23. BADDE AASANY SE DIL LAGAAYE JATE HAI PAR BADE MUSHKIL SAY WAADE NIBHAYE JATE HAI. LE JATI HAI MOHOBAT UN RAAHO PAR JAHNA DIYE NAHI DIL JALAAYE JATE HAI.

    Comment by neeru jaipur | अक्टूबर 30, 2009 | Reply

  24. but now i dnt have time to write such a thing

    Comment by DHIRENDRAKUMAR | नवम्बर 8, 2009 | Reply

  25. इक पल भी दूर जीना दुश्वार होता था…

    ५ साल बाद……..

    सुबह सुबह मैडम का चाय ले कर आना,
    टेबल पर रख कर जोर से चिल्लाना,
    आज ऑफिस जाओ तो मुन्ना को
    स्कूल छोड़ते हुए जाना…

    सुनो एक बार फिर वोही आवाज आयी,
    क्या बात है अभी तक छोड़ी नही चारपाई,
    अगर मुन्ना लेट हो गया तो देख लेना,
    मुन्ना की टीचर्स को फिर खुद ही संभाल लेना…

    ना जाने घरवाली कैसा रुप ले कर आयी थी,
    दिल और दिमाग पर काली घटा छाई थी,
    सांस भी लेते हैं तो उन्ही का ख़याल होता है,
    अब हर समय जेहन में एक ही सवाल होता है…

    क्या कभी वो दिन लौट के आएंगे,

    Comment by vinaykumar | नवम्बर 11, 2009 | Reply

  26. SUGRIV

    Comment by KADAM S.G.PATIL | नवम्बर 20, 2009 | Reply

  27. डार्लिंग चाय तो पी लो,
    जल्दी से रेडी हो जाओ,
    आप को ऑफिस भी है जाना…

    घरवाली भगवान का रुप ले कर आयी थी,
    दिल और दिमाग पर पूरी तरह छाई थी,
    सांस भी लेते थे तो नाम उसी का होता था,
    इक पल भी दूर जीना दुश्वार होता था…

    ५ साल बाद……..

    सुबह सुबह मैडम का चाय ले कर आना,
    टेबल पर रख कर जोर से चिल्लाना,
    आज ऑफिस जाओ तो मुन्ना को
    स्कूल छोड़ते हुए जाना…

    सुनो एक बार फिर वोही आवाज आयी,
    क्या बात है अभी तक छोड़ी नही चारपाई,
    अगर मुन्ना लेट हो गया तो देख लेना,
    मुन्ना की टीचर्स को फिर खुद ही संभाल लेना…

    ना जाने घरवाली कैसा रुप ले कर आयी थी,
    दिल और दिमाग पर काली घटा छाई थी,
    सांस भी लेते हैं तो उन्ही का ख़याल होता है,
    अब हर समय जेहन में एक ही सवाल होता है…

    क्या कभी वो दिन लौट के आएंगे,
    हम एक बार फिर कुंवारे हो जायेंगे….

    Comment by maruti | जनवरी 17, 2010 | Reply

  28. Niceeeeeeeeeeeee

    Comment by raj | अप्रैल 6, 2010 | Reply

  29. niceeeee good yerrrrrrrrrrrrr

    Comment by raj | अप्रैल 6, 2010 | Reply

  30. realy frndship means alot for us it is a need of every relation

    Comment by preety | अगस्त 22, 2010 | Reply

  31. GOOD NIET

    Comment by SUNIL KOLI | जनवरी 19, 2011 | Reply

  32. kuch aisa khayal jo harek ki zindgi me aata hai
    sayad har kishi ko likh dena mumkin nahi hopata
    kosis ki hai aap ko apna sa lage bataega ye kabhi na kabhi
    zindgi me bhoole visre yad ate hai

    thanks

    Comment by eknath | जनवरी 22, 2011 | Reply

  33. सुबह सुबह मैडम का चाय ले कर आना,
    टेबल पर रख कर जोर से चिल्लाना,
    आज ऑफिस जाओ तो मुन्ना को
    स्कूल छोड़ते हुए जाना…

    सुनो एक बार फिर वोही आवाज आयी,
    क्या बात है अभी तक छोड़ी नही चारपाई,
    अगर मुन्ना लेट हो गया तो देख लेना,
    मुन्ना की टीचर्स को फिर खुद ही संभाल लेना…

    ना जाने घरवाली कैसा रुप ले कर आयी थी,
    दिल और दिमाग पर काली घटा छाई थी,
    सांस भी लेते हैं तो उन्ही का ख़याल होता है,
    अब हर समय जेहन में एक ही सवाल होता है…

    क्या कभी वो दिन लौट के आएंगे,

    Comment by vinaykumar | नवम्बर 11, 2009 | Reply

    SUGRIV

    Comment by KADAM S.G.PATIL | नवम्बर 20, 2009 | Reply

    डार्लिंग चाय तो पी लो,
    जल्दी से रेडी हो जाओ,
    आप को ऑफिस भी है जाना…

    घरवाली भगवान का रुप ले कर आयी थी,
    दिल और दिमाग पर पूरी तरह छाई थी,
    सांस भी लेते थे तो नाम उसी का होता था,
    इक पल भी दूर जीना दुश्वार होता था…

    ५ साल बाद……..

    सुबह सुबह मैडम का चाय ले कर आना,
    टेबल पर रख कर जोर से चिल्लाना,
    आज ऑफिस जाओ तो मुन्ना को
    स्कूल छोड़ते हुए जाना…

    सुनो एक बार फिर वोही आवाज आयी,
    क्या बात है अभी तक छोड़ी नही चारपाई,
    अगर मुन्ना लेट हो गया तो देख लेना,
    मुन्ना की टीचर्स को फिर खुद ही संभाल लेना…

    ना जाने घरवाली कैसा रुप ले कर आयी थी,
    दिल और दिमाग पर काली घटा छाई थी,
    सांस भी लेते हैं तो उन्ही का ख़याल होता है,
    अब हर समय जेहन में एक ही सवाल होता है…

    क्या कभी वो दिन लौट के आएंगे,
    हम एक बार फिर कुंवारे हो जायेंगे….

    Comment by eknath | जनवरी 22, 2011 | Reply

  34. EK LADKI THI DIWANI
    MOBILE LEKAR GUMTI THI
    NAZRE JUKAKAR SHRMAKE
    MOBILE PE KUCH KUCH KARTI THI
    JAB BHI MUJSE MILA KARTI
    TAB EK HI SAWAL KARTI THI
    YE CHALU KESE HOTA HAI………..

    Comment by eknath | जनवरी 22, 2011 | Reply

  35. bahut bahut aacha laga dosti ke nap pe yah likh
    aati sundar
    waw

    Comment by vidhya | अगस्त 18, 2011 | Reply

  36. bahut yaad aate dost kaminey…hr wakt hr pal

    Comment by Raj Isharwal | अक्टूबर 22, 2011 | Reply


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