शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

भीगी-भीगी सी हैं..

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भीगी-भीगी सी हैं, रातें भीगी-भीगी, यादें भीगी-भीगी, बातें भीगी-भीगी.. आखों मे कैसी नमी है..

सपनॊं का साया, पलकों पे आया, पल में हंसाया, पल में रुलाया.. फ़िरभी ये कैसी कमी है..

आधी-आधी जागीं, आधी-आधी सोयीं, आंखें तेरी ये लगता है रोयीं.. ले करके नाम हमारा..

रूठा-रूठा रब, छूटा-छूटा सब, टूटा-टूटा दिल, तेरे बिना अब.. कैसे हो जीना गवरा..

ना जाने कोई.. कैसी है ये ज़िंदगानी.. ज़िंदगानी..
हमारी अधूरी कहानी..

——————फ़िल्म: गेंगस्टर. इसे “सुनें” / “देखें

August 17, 2006 Posted by Raj Gaurav | गीत | | No Comments Yet