शेर.. शायरी.. गीत..

मेरा संग्रह.. कुछ नया-कुछ पुराना..

कहते हैं तारे गाते हैं..

चंदा..तारे..

कहते हैं तारे गाते हैं!

सन्नाटा वसुधा पर छाया,
नभ में हमने कान लगाया,
फिर भी अगणित कंठों का यह राग नहीं हम सुन पाते हैं!
कहते हैं तारे गाते हैं!

स्वर्ग सुना करता यह गाना,
पृथिवी ने तो बस यह जाना,
अगणित ओस-कणों में तारों के नीरव आँसू आते हैं!
कहते हैं तारे गाते हैं!

ऊपर देव तले मानवगण,
नभ में दोनों गायन-रोदन,
राग सदा ऊपर को उठता, आँसू नीचे झर जाते हैं।
कहते हैं तारे गाते हैं!
———————————————-हरीवन्श राय बच्चन..

August 10, 2006 Posted by Raj Gaurav | कविता | | No Comments Yet

शुरुवात के तोर पे..!!

जैसा कि आप सभी ने देखा होगा.. आम तोर पे लगभग १० मे से ९ लोग शेर-ओ-शायरी के शोकीन होते हैं..

उन ९ लोगों मे से मैं भी एक हूं.. एक अच्छा शेर मेरे लिये एक अच्छे दिन की शुरुवात होता है.. :)

मैं भी लिखता हूं.. पर चिन्ता ना करें आपको ऐसा torture नहीं दूंगा मैं यहां पे.. इस ब्लोग पे चुने हुए अच्छे-अच्छे शेर.. शायरी.. या गीत.. लिखने के नेक इरादे से आप सभी का स्वागत करता हूं..

August 10, 2006 Posted by Raj Gaurav | Introductions | | No Comments Yet