तन्हाई..
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मेरे बाद किधर जायेगी तन्हाई..
मैं जो मरा तो मर जायेगी तन्हाई..
मै जब रो-रो के दरिया बन जाउंगा..
उस दिन पार उतर जायेगी तन्हाई..
तन्हाई को घर से रुखसत तो कर दूं..
सोचूं, किस के घर जायेगी तन्हाई..
वीराना हूं, आबादी से आया हूं..
देखेगी तो डर जायेगी तन्हाई..
यूं आओ के पाओं की भी आवाज़ ना हो..
शोर हुआ तो मर जायेगी तन्हाई..
—————————————–ज़फ़र गोरखपुरी
किसे आवाज़ दूं.. ???
अपनी तन्हाईयों में कोई साया भी नहीं..
कोई अपना भी नहीं.. कोई पराया भी नहीं..
किसे आवाज़ दूं.. किसे आवाज़ दूं..?
सारी झूटी बातें हैं.. दिन अपने हैं ना रातें हैं..
पल-पल एक कहानी है.. जो जीवन भर दोहरानी है..
किसे आवाज़ दूं.. किसे आवाज़ दूं.. ??
चेहरे क्या तस्वीरें हैं.. ना ख्वाब हैं ना ताबीरे हैं..
आस है जो कि जीवन है.. उल्झा-उल्झा बंधन है..
किसे आवाज़ दूं.. किसे आवाज़ दूं.. ???
————————————————— अदील..
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कैसे जिया तेरे बिन..
तेरे बिन, मैं यूं कैसे जिया, कैसे जिया तेरे बिन..
तेरे बिन, मैं यूं कैसे जिया, कैसे जिया तेरे बिन..
लेकर यादें तेरी, रातें मेरी कटी..
मुझसे बातें तेरी करती हैं चांदनी..
तन्हा हैं तुझ बिन रातें मेरी..
दिन मेरे दिन के जैसे नहीं..
तन्हा बदन, तन्हा है रूह.. नम मेरी आखें रहें..
आजा मेरे अब रूबरू, जीना नही बिन तेरे..
तेरे बिन, मैं यूं कैसे जिया, कैसे जिया तेरे बिन..
कब से आखें मेरी राह मे तेरे बिछीं..
भूले से ही कभी.. तूने लजाये कहीं..
भूलें ना मुझसे बातें तेरी.. भीगी हैं हर-पल आखें मेरी..
क्युं सांस लू, क्यु मैं जियूं, जीना बुरा सा लगे..
क्युं हो गया तू बेवफ़ा, मुझको बतादे वजह..
तेरे बिन, मैं यूं कैसे जिया, कैसे जिया तेरे बिन..
तेरे बिन, मैं यूं कैसे जिया, कैसे जिया तेरे बिन..
तेरे बिन.. तेरे बिन.. तेरे बिन.. मै ऐसे जिया..
—————————————————-आतिफ़ अस्लम..
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दोस्ती..
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दोस्ती नाम नहीं सिर्फ़ दोस्तों के साथ रेहने का..
बल्की दोस्त ही जिन्दगी बन जाते हैं, दोस्ती में..
जरुरत नहीं पडती, दोस्तों की तस्वीर की.
देखो जो आईना तो दोस्त नज़र आते हैं, दोस्ती में..
येह तो बहाना है कि मिल नहीं पाये दोस्तों से आज..
दिल पे हाथ रखते ही एहसास उनके हो जाते हैं, दोस्ती में..
नाम की तो जरूरत ही नहीं पडती इस रिश्ते मे कभी..
पूछे नाम अपना ओर, दोस्तॊं का बताते हैं, दोस्ती में..
कौन केहता है कि दोस्त हो सकते हैं जुदा कभी..
दूर रेह्कर भी दोस्त, बिल्कुल करीब नज़र आते हैं, दोस्ती में..
सिर्फ़ भ्रम है कि दोस्त होते हैं अलग-अलग..
दर्द हो इनको ओर, आंसू उनके आते हैं , दोस्ती में..
माना इश्क है खुदा, प्यार करने वालों के लिये “अभी”
पर हम तो अपना सिर झुकाते हैं, दोस्ती में..
ओर एक ही दवा है गम की दुनिया में क्युकि..
भूल के सारे गम, दोस्तों के साथ मुस्कुराते हैं, दोस्ती में..
————————————————-अभिनव जैन..
चाह्ता हूं, मैं..
एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं, मैं..
खुशी हो या गम, बस मुस्कुराना चाह्ता हूं, मैं..
दोस्तॊं से दोस्ती तो हर कोई निभाता है..
दुश्मनों को भी अपना दोस्त बनाना चाहता हूं, मैं..
जो हम उडे ऊचाई पे अकेले, तो क्या नया किया..
साथ मे हर किसी के पंख फ़ैलाना चाह्ता हूं, मैं..
वोह सोचते हैं कि मैं अकेला हूं उन्के बिना..
तन्हाई साथ है मेरे, इतना बताना चाह्ता हूं..
ए खुदा, तमन्ना बस इतनी सी है.. कबूल करना..
मुस्कुराते हुए ही तेरे पास आना चाह्ता हूं, मैं..
बस खुशी हो हर पल, और मेहकें येह गुल्शन सारा “अभी”..
हर किसी के गम को, अपना बनाना चाह्ता हूं, मैं..
एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं, मैं..
खुशी हो या गम, बस मुस्कुराना चाह्ता हूं, मैं..
——————————————- अभिनव जैन..
ना मिलेगा..
भीगी हुई आंखों का ये मंज़र ना मिलेगा..
घर छोड के ना जाओ, कहीं घर ना मिलेगा..
फ़िर याद बहुत आयेगी, वो ज़ुल्फ़ों की घनी शाम..
जब धूप मे साया कोई सर पे ना मिलेगा..
आंसू को कभी ओस का कतरा ना समझना..
ऐसा तुम्हे चाहत का समंदर ना मिलेगा..
इस ख्वाब के माहोल मे, बे-ख्वाब हैं आंखें..
जब नींद बहुत आयेगी, बिस्तर ना मिलेगा..
येह सोच लो अब आखिरी साया है मोहोब्ब्त..
इस दर से जो उठ गये, कोई दर ना मिलेगा..
काश..
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हर किसी का कोई होता सहारा.. हर दिल का कोई दिल होता प्यारा..
हर रात की एक सुबह होती.. फ़ूलों सा खिलता जहां..
काश.. ऐसा होता.. काश.. कोई ना रोता..
काश.. पास आकर.. काश.. कोई ना खोता..
काश कि यूं डाल पर फ़ूल मुरझाते नहीं.. काश होता रंग से ही सजा जहान..
अश्क और दर्द के लफ़्ज़ होते ही नहीं.. टूटते ना प्यार के ख्वाब फ़िर यहां..
टूटने ही थे अगर.. काश सपने ही जरा कम होते..
अपनी सारी मंजिलें काश मिल जाती हमें.. भूल हमसे ना कोई एक भी होती..
काश होता साथ ये ज़िन्दगी भर के लिये.. छूटता ना हाथ फ़िर हाथ से कभी..
जो रहा ना साथ तो.. काश अरमां भी ज़रा कम होते..
हर किसी का कोई होता सहारा.. हर दिल का कोई दिल होता प्यारा..
हर रात की एक सुबह होती.. फ़ूलों सा खिलता जहां..
काश.. ऐसा होता.. काश.. कोई ना रोता..
काश.. पास आकर.. काश.. कोई ना खोता..
———————————————विशाल डाडलानी..
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क्या लिखूं, सोच रहा हूं..
क्या लिखूं, सोच रहा हूं कलम हांथ में लेकर..
लिखूं उसके बारे में जो चला गय दिल तोडकर..
या फ़िर लिखूं कुछ किस्से.. वक्त मे पीछे लौटकर..
या फ़िर लिखूं उन सपनों के बारे मे जिन्हें छूना चाहता था मैं दौडकर..
चलो पेहले लिखें दास्तान अपने पेहले प्यार की..
जो मिला था हमें ज़िन्दगी के एक छोटे से मोड पर..
दीवाने हो गये थे हम उस गुमसुन सी हंसी को देख कर..
सोचा ना था, वक्त बार-बार लायेगा हमें इस मोड पर..
चलते रहे हम उस हसीन वक्त का हाथ पकड कर..
सब कुछ तो भुला दिया था हमने उस गुमसुम सी हंसी पर..
ज़िन्दगी की पगडंडियों से गुज़रते हुए.. हम लौट आये उसी छोटे से मोड पर..
लिखते हुए पन्नों पर उस वक्त की चंद भूली-बिसरी बातें, बाकी सब भूलकर..
अब कभी भी जब दुनिया बताती है, कि कुछ गम की छीटें हैं हमारी हंसी पर..
याद आती है हमें वो गुमसुम सी हंसी जो मिली थी हमें उस छोटे से मोड पर..
———————————————————————————Author Unknown..
सोचा नहीं..
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सोचा नहीं अच्छा-बुरा, देखा-सुना कुछ भी नहीं..
मांगा खुदा से रात-दिन, तेरे सिवा कुछ भी नहीं..
देखा तुझे, सोचा तुझे, चाहा तुझे, पूजा तुझे..
मेरी खता मेरी वफ़ा, तेरी खता कुछ भी नहीं..
जिस पर हमारी आंख ने मोती बिछाये रात-भर..
भेजा उन्हे कागज़ वोही, लिखा मगर कुछ भी नहीं..
मांगा खुदा से रात-दिन, तेरे सिवा कुछ भी नहीं..
एक शाम की दहलीज पर, बैठे रहे वो देर तक..
आंखों से की बातें बहुत, मुह से कहा कुछ भी नहीं..
सोचा नहीं अच्छा-बुरा, देखा-सुना कुछ भी नहीं..मांगा खुदा से रात-दिन, तेरे सिवा कुछ भी नहीं..
देखा तुझे, सोचा तुझे, चाहा तुझे, पूजा तुझे..
मेरी खता मेरी वफ़ा, तेरी खता कुछ भी नहीं..
—————————————————–बशीर बद्र..
क्यों..???
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बेनाम सा ये दर्द, ठहर क्यों नही जाता..
जो बीत गया है, वो गुज़र क्यों नही जाता..
सब कुछ तो है, क्या ढूंढती हैं ये निगाहें..
क्या बात है, मैं वक्त पे घर क्यों नहीं जाता..
वो एक चेहरा तो नहीं सारे जहां मे..
जो दूर है वो दिल से उतर क्यों नही जाता..
देखता हूं मैं अपनी ही उलझी हुई, राहों का तमाशा..
जाते हैं सब जिधर, मैं उधर क्यों नहीं जाता..
वो नाम ना जाने कब से, ना चेहरा ना बदन है..
वो ख्वाब है अगर तो बिखर क्यों नहीं जाता..
——————————————-Author Unknown..
